अमेठी सिटी। किसानों को मुफ्त सिंचाई की सुविधा देने के विभागीय दावे कागजी साबित हो रहे हैं। संसाधनों के साथ ही ऑपरेटरों की कमी से जिले में मुफ्त सिंचाई सुविधा पटरी से उतरी है। जिले में 25 हजार हेक्टेअर जमीन की सिंचाई के लिए विभाग के पास 363 नलकूपों के संचालन के लिए सिर्फ 76 ऑपरेटर हैं। ऐसे में सरकारी नलकूपों से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है।
मौजूद 363 नलकूपों में से भी 52 नलकूप पानी न दे पाने के कारण सूखे पड़े हैं जबकि 39 नलकूप की बोरिंग फेल हो चुकी है। जिले में नहरों से वंचित सिंचित क्षेत्रों में सिंचाई के लिए सरकारी नलकूपों से मुफ्त पानी देने की सुविधा है। इस कारण करीब 25 हजार हेक्टेअर भूमि की सिंचाई सरकारी नलकूपों के भरोसे हैं। चिह्नित क्षेत्र में किसान सरकारी नलकूपों पर ही आश्रित होकर अपनी खेती करते हैं।
विभागीय मानक के अनुसार प्रत्येक नलकूप के लिए एक ऑपरेटर का मानक तय है। तैनात नलकूप चालक की ड्यूटी सुबह सात बजे से दो बजे तक होती है। ऑपरेटरों कमी के कारण वर्तमान में एक ऑपरेटर के जिम्मे करीब चार से पांच नलकूप चलाने की जिम्मेदारी है। इस कारण आए दिन संचालन प्रभावित होता है। इससे किसानों को खेतों में सिंचाई न हो पाने की परेशानी उठानी पड़ती है। हालांकि अधिशासी अभियंता राजेश कुमार यादव का कहना है कि सरकारी नलकूपों से किसानों को निशुल्क सिंचाई की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। नलकूप ऑपरेटर की तैनाती का मामला शासन स्तर पर लंबित है।
तकनीकी स्टाफ का भी टोटा
सिंचाई विभाग के नलकूप खंड में चार उपखंड है। जिसमें अमेठी, गौरीगंज, मुसाफिरखाना व स्टोर कार्यशाला है। इस समय नलकूप खंड में 16 मिस्त्री के सापेक्ष चार मिस्त्री, 16 जेई के सापेक्ष नौ जेई व चार एई के सापेक्ष तीन एई की तैनाती है। वहीं तीन जिलेदार व 14 अमीन कार्यरत हैं।
पानी दोहन रोकने के लिए बोर में भी कमी
सिंचाई विभाग के नलकूप खंड की ओर से पहले सरकारी नलकूपों का बोर बड़ा होता था। एक नलकूप की सिंचाई क्षेत्र का मानक करीब 100 हेक्टेअर होता था। लेकिन पानी के दोहन को कम करने के लिए विभाग ने बोर कम कर दिया है। ऐसे में नए नलकूपों से करीब 50 हेक्टेअर ही सिंचाई का मानक रखा गया है।
