संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ

Updated Fri, 22 Nov 2024 02:47 AM IST

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Taposthali was buzzing with followers, worshipers prayed

आनंद बो​धि पर प्रार्थना करते अनुयायी।



कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में बृहस्पतिवार को अनुयायियों से गुलजार रही। तपोस्थली पहुंचे वियतनाम से 40, थाईलैंड से 50, श्रीलंका से 150, ताइवान से 40 व महाराष्ट्र से 175 सदस्यीय दल ने आनंद बोधि पर विशेष प्रार्थना की। इस दौरान दल के सदस्यों ने भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में विश्व शांति की कामना की।

बौद्ध सभा के दौरान भिक्षु देवानंद ने कहा कि गृह त्याग के बाद सिद्धार्थ ने अनोमा नदी (कपिलवस्तु) के तट पर सिर को मुड़वाकर भिक्षुओं का काषाय वस्त्र धारण किया। सात वर्ष तक सिद्धार्थ ज्ञान की खोज में इधर-उधर भटकते रहे सर्वप्रथम वैशाली के समीप अलार कलाम (सांख्य दर्शन के आचार्य) नामक संयासी के आश्रम में आए, इसके बाद उरुवेला (बोधगया) के लिए प्रस्थान कर गए थे। जहां उन्हें कौडिन्य सहित पांच साधक मिले। छह वर्ष घोर तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख पूर्णिमा की रात पीपल वृक्ष के नीचे निरंजना (पुनपुन) नदी के तट पर उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। इस दौरान काफी संख्या में उपासक मौजूद रहे।



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