
कटेहरी उपचुनाव।
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कटेहरी उपचुनाव में भाजपा ने डबल इंजन की ताकत दिखा दी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने जीत की जो राह सुझाई उसे संगठन ने आत्मसात किया और करके भी दिखा दिया। शांति से…। कुशलता से…। सपा के आरोपों को दरकिनार करते हुए अंत तक नजर बस लक्ष्य पर ही टिकी रही। ऐतिहासिक जीत के रूप में परिणाम सुखद रहा। संतुष्ट करने वाला रहा। नए संदेश के साथ समीकरण साधने वाला भी।
अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंडल का यह पहला उपचुनाव रहा। ऐसे में फैजाबाद संसदीय सीट हारने के बाद कटेहरी को भाजपा ने प्रतिष्ठा से जोड़कर जीत की रणनीति बनाई। कमान खुद सीएम योगी ने संभाली। पहले संगठन को साधा और फिर प्रत्याशी के चयन को लेकर पार्टी नेताओं में चल रहे मनमुटाव को दूर किया।
जातीय समीकरण को संतुलित किया। इस सबके बाद बसपा के काडर वोटरों में मजबूत पैठ रखने वाले धर्मराज निषाद को मैदान में उतारा। आंतरिक कलह की आशंका को जड़ से समाप्त करने के लिए बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से खुद मिले। दावेदारों को बात कर संतुष्ट किया। किलेबंदी के बाद ताबड़तोड़ पांच सभाएं कर सपा के साथ ही बसपा को भी चौंकाया। हर बार सीएम का संदेश साफ रहा…जीत…जीत और सिर्फ जीत…। अंबेडकरनगर के विकास के लिए जीत को जरूरी बताया। सीएम की बात मतदाताओं तक पहुंची और उन्होंने मतदान के समय इसे दिखाया भी।
वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के बाद भी कटेहरी सीट पर जीत नहीं मिल सकी थी। यहां बसपा से सपा में शामिल हुए कद्दावर पूर्व मंत्री लालजी वर्मा ने भाजपा गठबंधन से निषाद पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अवधेश कुमार को 7,696 मतों के अंतर से हरा दिया। लालजी वर्मा को कुल 93,542 मत मिले तो निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) को 85,828 मतों से संतोष करना पड़ा था। बसपा के प्रतीक पांडेय को 58,482 मत मिले। तब कुल 10 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, जिनमें दो महिलाएं भी थीं। कटेहरी के मतदाताओं ने सात प्रत्याशियों की जमानत भी जब्त करा दी थी।
