यूपी के एक पुराने विश्वविद्यालय में नए मुखिया के आने के बाद माहौल बदल गया है। वहीं, राजस्व वाले विभाग में बदलाव होने से ठंडे पड़े बाहुबली सक्रिय हो गए हैं। एक आयुर्वेद चिकित्साधिकारी का राजसी दरबार चर्चा में है।

इन विभागों की कानाफूसी:

सख्ती से पसर गया सन्नाटा

प्रदेश के एक पुराने विश्वविद्यालय में काफी दिनों से चल रही हलचल और उठापटक पर नए मुखिया के आने के साथ ही फिलहाल विराम लग गया है। इतना ही नहीं, गुरुजनों से सुबह से शाम तक गुलजार रहने बाले कुलपति कार्यालय व प्रशासनिक भवन कॉरिडोर में भी सन्नाटा पसरा है। पता चला है कि नए मुखिया ने एक गुरु जी ने कक्षाओं के समय में प्रशासनिक भवन आने का कारण पूछ लिया था। बस फिर क्या था, कानोंकान यह खबर पूरे कैंपस में फैल गई। इसके बाद तो शाम पांच बजे तक अब प्रशासनिक भवन में सन्नाटा ही रहता है।

एडवांस वाले बाहुबली सक्रिय

राजस्व वाले एक महकमे में बदलाव की बयार आते ही ठंडे बस्ते में पड़े कई ‘बाहुबली’ फिर सक्रिय हो गए हैं। अपनी खोई ताकत वापस पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हैं। इस बीच गलियारों में एक चर्चा आग की तरह फैल रही है कि बाहुबलियों की इस टीम ने ट्रांसफर पोस्टिंग का दावा शुरु कर दिया दिया है। एडवांस बुकिंग शुरु कर दी है और पिछला घाटा भी पूरा करने के लिए रेट बिल्कुल हजरतगंज की जमीन के माफिक हाई कर दिए हैं।

चिकित्साधिकारी का दरबार

प्रदेश में एक आयुर्वेद चिकित्साधिकारी सुर्खियों में हैं। इनका राजसी दरबार है। इस दरबार में घुसने के लिए हर किसी को इजाजत नहीं है। दरबार में जाने से पहले रिमोट से खुलने वाले दरवाजे को पार करना पड़ता है। यह दरवाजा तभी खुलता है जब चिकित्साधिकारी की इजाजत होती है। सार्वजनिक विभाग में इस तरह की व्यवस्था इन दिनों सुर्खियों में है।

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