लखनऊ -अगर आपको कानों में सीटी, घंटी या मक्खी भिनभिनाने की आवाज आए तो इसे सिर्फ कान से जुड़ी बीमारी न समझें। ये दिमाग के सर्किट में गड़बड़ी यानी टिनिटस के संकेत भी हो सकते हैं। इसकी चपेट में कई नौकरशाह, डॉक्टर, व्यापारी और महिलाएं भी हैं। ये जानकारी सेंटर ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च (सीबीएमआर) और संजय गांधी पीजीआई के अध्ययन में सामने आई .

अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय शोधपत्र यूरोपियन जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंसेज में जगह मिला है। अब इस बीमारी के इलाज की नई गाइडलाइन बनाई जा रही है। कान में घंटी बजने या शोर आमतौर पर कान में संक्रमण, सुनने में कमी, ब्लड प्रेशर के कारण होती है। दवाएं चलने पर ये ठीक हो जाते हैं लेकिन कुछ मरीजों को लंबे इलाज के बाद भी आराम नहीं मिलता। चिकित्सा संस्थानों में हर महीने ऐसे 10 से 12 मरीज आते हैं।

सीबीएमआर के प्रो. उत्तम कुमार के नेतृत्व में टिनिटस पर अध्ययन किया गया। इसमें सेंटर के डॉ. हिमांशु पांडे, प्रो. नीरज सिन्हा और पीजीआई के हेड एंड नेक सर्जरी के विभागाध्यक्ष प्रो. अमित केशरी शामिल रहे। विशेषज्ञों ने 57 टिनिटस और 57 सामान्य मरीज चिह्नित किए। टिनिटस वाले मरीजों पर दवाएं कई साल इलाज के बाद भी बेअसर हो रही थीं।

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