जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में जिम्मेदारियों की ऐसी उलटबांसी देखने को मिल रही है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लिपिक जहां पर्चे तैयार कर दवाएं बांट रहे हैं। वहीं आयुष चिकित्सकों से बिलों की जांच और भुगतान से जुड़ा काम कराया जा रहा है। सीएचसी पर हेल्थ सुपरवाइजर लिपिक का काम कर रहे हैं। सीएमओ दफ्तर में तकनीकी कर्मी फाइलें निपटा रहे हैं। अव्यवस्था की यह स्थिति सिर्फ सीएमओ कार्यालय तक सीमित नहीं, बल्कि पीएचसी और सीएचसी स्तर तक है।
आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि सीएमओ दफ्तर में रीतेश कुमार सिंह को प्रशासनिक अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है। पद के अनुरूप कार्य नहीं देने को लेकर रीतेश कुमार ने कई बार सीएमओ को पत्र लिखा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उसके बाद अपर निदेशक व मंडलायुक्त को पत्र लिखा गया। अपर निदेशक ने सीएमओ को शासन की मंशानुसार प्रशासनिक कार्य कराने का पत्र लिखा है। सूत्रों ने यह भी बताया कि पिछले साल सितंबर महीने में जिले में 24 कनिष्ठ सहायकों को तैनात किया गया जिनमें से 21 की तैनाती पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पर की गई है। कनिष्ठ लिपिकों ने बताया कि पीएचसी पर लिपिक का कोई काम नहीं है। इसलिए जरूरत पड़ने पर वे पर्चे बनाते हैं तो कभी दवा भी बांटनी पड़ती है। बाकी समय फोन पर गुजार देते हैं। वहीं, सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों) पर बेसिक हेल्थ सुपरवाइजर या हेल्थ सुपरवाइजरों से लिपिक का काम कराया जा रहा है।
यही नहीं, सीएचसी बरुआसागर में तैनात आयुष चिकित्सक सीएमओ दफ्तर में डीजल-पेट्रोल की पर्ची बनाने आदि का काम करते हैं। यहां तक कि मलेरिया निरीक्षक, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, अपर शोध अधिकारी भी लिपिक का काम कर रहे हैं। खास बात यह कि पांच फार्मासिस्ट को सीएमओ दफ्तर के कंट्रोल रूम में तैनात किया गया है। वहीं अधिकारियों की मनमानी से खफा कर्मचारियों का कहना है कि स्पष्ट कार्य विभाजन न होने से तकनीकी और चिकित्सकीय दक्षता का दुरुपयोग हो रहा है। आयुष डॉक्टरों को जहां मरीज देखने और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निगरानी करनी चाहिए, वहीं वे फाइलों और बिलों में उलझे हैं। हालांकि सीएमओ ने आयुष चिकित्सक से बिल का काम कराने और फील्ड के कर्मियों से लिपिक का काम लेने के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया।
तकनीकी कर्मचारी लिपिक का काम कर सकता है। रही बात नवनियुक्त कनिष्ठ सहायक लिपिकों की पीएचसी पर तैनाती की तो उन्हें काम सिखाया जा रहा है।– डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमओ
