आम लोगों को नियम कायदों का पाठ पढ़ाने वाले सरकारी महकमे वर्षों से पानी का बिल नहीं चुका रहे हैं। वित्तीय वर्ष खत्म होने के कगार पर पहुंचने के बाद भी 50 से अधिक सरकारी महकमों ने अपनी हनक की बदौलत टैक्स का पैसा दबा रखा है। इन सभी पर कुल 18.23 करोड़ रुपये का बकाया हो चुका। वहीं, मामूली बकाये पर छोटे भवन स्वामियों को कुर्की का नोटिस भेजने वाले जल संस्थान के अफसर भी इन महकमों को लेकर दरियादिली दिखा रहे हैं। उनकी नरमी के चलते करीब पांच साल से यह महकमे बिल चुकता नहीं कर रहे हैं, इस वजह से जल संस्थान की माली हालत बिगड़ती जा रही है।
जल संस्थान के बड़े बकायेदारों में पुलिस विभाग, विद्युत विभाग, चिकित्सा विभाग, लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग जैसे रसूखदार महकमे शामिल हैं। इन महकमे को हर साल बिल भेजा जाता है लेकिन, अफसर इसे चुकता करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते। इसके चलते इन विभागों पर लाखों-करोड़ों का बकाया हो चुका। पानी का बिल न चुकाने में सिंचाई विभाग सबसे आगे है। उसके ग्यारह कार्यालयों ने पिछले कई साल से एक रुपये भी टैक्स जमा नहीं किया। इससे सिंचाई विभाग पर ही 2.83 करोड़ बकाया हो गया। सीएमओ ऑफिस समेत सात कार्यालयों ने कई साल से पानी का बिल नहीं जमा किया।आंकड़ों के अनुसार चिकित्सा विभाग के कार्यालय पर 2.35 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है। इसी तरह लोक निर्माण विभाग पर 332974 रुपये तो आकाशवाणी पर 613780 रुपये बकाया है। राजस्व विभाग पर 432518 रुपये, पशुपालन विभाग पर 623515 रुपये, आईएमए भवन पर 1187614 रुपये का मोटा बकाया हो चुका है।
