समाजवादी पार्टी ने विधान परिषद में किसानों को उपज का उचित मूल्य न मिलने, बढ़ती लागत, उत्पादन में कमी, प्राकृतिक आपदा, अन्ना पशुओं और सरकारी योजनाओं की जमीनी विफलताओं का मुद्दा उठाया। इन मुद्दों पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के जवाब से असंतुष्ट होकर सपा ने सदन का बहिर्गमन कर दिया।

बृहस्पतिवार को नियम 105 के अंतर्गत सपा के बलराम यादव, राजेन्द्र चौधरी, लाल बिहारी यादव, आशुतोष सिन्हा, डॉ. मान सिंह यादव, मोहम्मद जासमीर अंसारी, शाहनवाज खान, मुकुल यादव और शाह आलम ने किसानों की समस्याएं उठाते हुए कहा कि खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, बिजली और सिंचाई के संसाधनों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। जबकि लागत के अनुरूप आमदनी नहीं बढ़ी है। सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य तो घोषित किया जाता है लेकिन वह लागत से काफी कम होता है। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के संचालन, क्रियान्वन और सहायता के लिए कृषि विभाग ने कृषि विस्तार अधिकारी तैनात किए हैं जिनके कुल 303 पदों में से 273 पद खाली हैं। 50 जिलों में तो एक भी अधिकारी नहीं है। 

मिट्टी की उर्वरता की रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा कि यूपी के 65 फीसदी से ज्यादा जिलों की खेती की मिट्टी में जिंक की कमी है। बरेली में 21000 से ज्यादा मिट्टी के नमूनों में 20932 में नाइट्रोजन की कमी पाई गई। पीलीभीत में 9793 सैम्पल में 9788 में नाइट्रोजन कम पाई गई। उन्होंने कहा कि हरी खाद और कम्पोस्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए।

चर्चा के दौरान किरणपाल कश्यप ने कहा कि जब दुकानदार अपनी दुकान में रखे उत्पादों का मूल्य तय कर सकता है तो किसान अपनी फसल का मूल्य क्यों नहीं तय कर सकता। उन्होंने कहा कि गोरखपुर, महाराजगंज आदि जिलों के कोल्ड स्टोरेज किसानों के आलू का बीमा नहीं कराते। अन्ना पशुओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के किसान डंडा लेकर खेत का चौकीदार बनने को मजूबर हैं।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की सरकार किसानों के हित में है। यही वजह है कि यूपी में प्रति व्यक्ति आय 2017 से पहले 54000 रुपये सालाना थी जो वित्त वर्ष 26-27 में बढ़कर 1.20 लाख रुपये अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य से ज्यादा धान क्रय किया गया। 16 लाख से ज्यादा किसानों का 3600 करोड़ से ज्यादा बिजली बिल माफ किया गया। नौ साल में 3 लाख करोड़ से ज्यादा का गन्ना खरीद भुगतान किया गया। कृषि मंत्री ने तंज कसा कि वर्ष 2012 में मिल मालिकों के साथ सांठगांठ सभी को पता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में बुंदेलखंड के सात खंडों में प्राकृतिक खेती की योजना लाई जा चुकी है जो पांच वर्ष के लिए है। अब प्रदेश के सभी 75 जिलों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि मंत्री के जवाब पर तीखी बहस के बाद सपा सदस्यों ने विधान परिषद से बहिगर्मन कर दिया।

 



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