पाबंदी होने के बाद भी नाबालिग लड़कियों की शादी पर विराम नहीं लग पा रहा है। इसका ताजा उदाहरण बबीना थाना क्षेत्र के गांव में देखने को मिला। यहां ललितपुर से बरात लेकर आया बालिग दूल्हा नाबालिग लड़की से शादी करने जा रहा था। दुल्हन के जीजा की सूचना पर पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम मौके पर पहुंची। बाल विवाह रुकवाया गया। बरात लौट गई। अगले दिन नाबालिग के परिजनों को बाल कल्याण समिति में पेश किया गया। उन्हें समझाया गया कि उम्र पूरी होने पर बेटी का विवाह सामूहिक विवाह योजना में करा दें।
बबीना थाना क्षेत्र के एक गांव में 21 फरवरी को 16 साल की लड़की का विवाह कराया जा रहा था। मामले की सूचना हेल्पलाइन नंबर 112 पर दी गई। कंट्रोल रूम लखनऊ की सूचना पर पुलिस और चाइल्डलाइन टीम तत्काल मौके पर पहुंची। मौके पर कुछ ही देर में वरमाला होने वाली थी। तभी शादी रुकवा दी गई। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजीव शर्मा, सदस्यगण परवीन खान, कोमल सिंह, दीप्ति सक्सेना व हरिकृष्ण सक्सेना ने परिजनों को समझाया कि नाबालिग का विवाह करना अपराध है। इसमें सजा हो सकती है और बेटी का भविष्य भी बर्बाद हो सकता है।
बेटी की मां ने कहा – मुझे गंभीर बीमारी, इसलिए कर रही थी शादी
समिति के समक्ष नाबालिग लड़की की मां ने अपना दर्द बयान किया। उसने बताया कि आए दिन उसकी तबीयत खराब रहती है। इसलिए सोचा की अंतिम सांस लेने से पहले बेटी के हाथ पीले हो जाएं तो आत्मा को शांति मिलेगी।
अब तक रुकवा चुके हैं आठ विवाह
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में नाबालिग आठ लड़कियों की शादी रुरकवाई जा चुकी है। इसमें शाहजहांपुर, गरौठा, रक्सा, बड़ागांव, मऊरानीपुर की दो, गुरसराय, बबीना में शादी कराई जा रही थी, उन्हें रोका गया है।
यह है नियम
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत प्रावधान है कि अगर कोई माता-पिता अपनी नाबालिग बेटी की शादी करते हैं तो कठोर कारावास और जुर्माना भी हो सकता है। कार्रवाई के दौरान बरात में शामिल लोग, बैंड ,टेंट हाउस यहां तक कि मैरिज हाउस वालों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
