नई आबकारी नीति के बाद जनपद में अंग्रेजी एवं देसी शराब व्यवस्थापन का काम शुरू कर दिया गया। अगले महीने तक यह काम पूरा किया जाना है। नई नीति में लाइसेंस फीस में करीब 10 फीसदी की कमी हुई है। हालांकि इन्हें इटेंट के मुताबिक पैसा देना होगा। इससे सबसे अधिक सहूलियत छोटे कारोबारियों को होगी। लाइसेंस फीस में कटौती होने से छोटे कारोबारियों को भी काम करने का मौका मिलेगा।

अभी तक शराब के होलसेल लाइसेंस के लिए व्यापारियों को 20-25 लाख रुपये फीस जमा करनी पड़ती थी। समस्या यह थी कि जिन गोदामों से शराब की उठान कम होती थी, उनको भी पूरी निर्धारित फीस चुकानी पड़ती थी। इससे छोटे एवं मध्यम कारोबारी इससे दूर रहते थे। अब नई आबकारी नीति में लाइसेंस फीस घटाई गई है। नए वित्तीय वर्ष में लाइसेंस फीस घटाकर 2 लाख रुपये कर दी गई। हालांकि अब एक निश्चित प्रतिशत के आधार पर 0.4 से 0.5 फीसदी शुल्क लिया जाएगा। अधिक बिक्री या उठान होने पर उसी अनुपात में शुल्क देना होगा। कम कारोबार करने वालों को कम शुल्क चुकाना होगा। इससे छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी।

आबकारी अफसरों का कहना है कि इससे गोदामों में अनावश्यक दबाव कम होगा। नगर निगम और देहात क्षेत्रों में दुकानों का कोटा बढ़ाया गया है। जिला आबकारी अधिकारी मनीष कुमार का कहना है कि लाइसेंस फीस कम होने से छोटे कारोबारी को फायदा होगा। दुकानों का व्यवस्थापन आरंभ कर दिया गया है।

अंग्रेजी की तर्ज पर अब देसी शराब में भी ‘छोटू’

नई आबकारी नीति जारी होने के बाद पहली दफा अंग्रेजी शराब की तर्ज पर देसी शराब का 100 एमएल का ‘छोटू’ पैक उपलब्ध कराया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अंग्रेजी शराब की कीमतों में 10 से 30 रुपये तक का इजाफा होगा। आबकारी निरीक्षक मनोज कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक अब तक देसी शराब में ‘पौवा’ सबसे छोटी इकाई थी। अब 100 एमएल की 42.8 डिग्री तीव्रता वाली बोतल बाजार में उतारी जाएगी, जिसकी कीमत 50 रुपये निर्धारित की गई है।



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