जालसाज ने खुद को जिलाधिकारी बताकर कस्बे के दिनकरपुर झलौआ गांव निवासी 75 वर्षीय श्रमिक मोतीलाल को जमीन दिलाने का झांसा दिया। फिर करीब चार माह में उनसे नौ लाख रुपये ऐंठ लिए। इस बीच आरोपी खुद को एसडीएम, बीडीओ, पटवारी और दरोगा बताकर पीड़ित से संपर्क भी करता रहा। बीकेटी पुलिस ने शुक्रवार को रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को हिरासत में ले लिया।

मोतीलाल ने बताया कि नवंबर 2025 में उनके पास अनजान नंबर से कॉल आई थी। कॉल उठाते ही आवाज आई हैलो….मोतीलाल बोल रहे हो। मैं जिलाधिकारी हूं…तुम्हारी जमीन बिसवां और बाबागंज में निकली है। यह सुनते ही मोतीलाल खुशी से झूम उठे। ठग ने कहा कि पैमाइश के बाद जमीन तुम्हें मिल जाएगी।

मैं चंदाकोडर गांव निवासी राजेश को तुम्हारे पास भेज रहा हूं उससे आगे की बात कर लेना। पीड़ित ने बताया कि राजेश उनसे कई बार मिला और कभी 20 हजार, कभी 45 हजार तो ढाई लाख रुपये लेता रहा। इस तरह से उन्होंने कई टुकड़ों में फरवरी तक करीब 9 लाख ले लिए।

जमीन बेची जेवर बेचे, मगर नहीं मिली जमीन

मोतीलाल ने बताया कि जालसाज कभी खुद को एसडीएम तो कभी बीडीओ और पटवारी बताकर उनसे बात करता रहा। रुपयों के इंतजाम के लिए उन्होंने फसल, पत्नी के जेवर और जमीन तक बेच डाली, मगर उनके हाथ कुछ नहीं आया। वह जब भी जमीन की बात करते आरोपी टाल-मटोल करता रहता।

जब दरोगा बताकर की बात, तब हुआ संदेह

मोतीलाल के अनुसार, राजेश ने 23 फरवरी को उन्हें दूसरे नंबर से कॉल की। इस बार उसने खुद को मलिहाबाद थाने में तैनात दरोगा बताया। उसने कहा कि तुम्हारे परिचित राजेश को जमीन के कागज लाने के दौरान पकड़ा है। अगर छुड़वाना चाहते हो तो रुपये दो। इस बार पीड़ित को दरोगा की आवाज राजेश की लगी और उसने बीकेटी थाने में तहरीर दे दी।

इंस्पेक्टर बोले- केस दर्ज, एसीपी ने नकारा

इंस्पेक्टर बीकेटी संजय सिंह ने बताया कि जांच के बाद शुक्रवार को आरोपी राजेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे हिरासत में लिया गया है। आरोपी ने ठगी में तीन नंबरों का इस्तेमाल किया था। उससे पूछताछ की जा रही है। वहीं, एसीपी बीकेटी ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि पुलिस को तहरीर मिली थी। अभी तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है और न ही राजेश को हिरासत में लिया गया है।



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