पर्यटकों के लिए नए केंद्रों को विकसित करने में जुटे पर्यटन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। लखनऊ से सटे सीतापुर स्थित नैमिषधाम में अत्याधुनिक सुविधाओं के बढ़ने व स्थानीय अल्पज्ञात स्थलों के विकास से अब यह पर्यटकों के टूर पैकेज में भी शामिल हो रहा है। लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी व अयोध्या आने वाले श्रद्धालु व पर्यटक नैमिषधाम भी पहुंच रहे हैं।

प्रदेश सरकार की ओर से नैमिषारण्य में 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित अल्पज्ञात धार्मिक स्थलों का पुनरुद्धार कराया गया है। पड़ाव के 11 प्रमुख धार्मिक स्थलों हरैया के सिद्धदात्री माता मंदिर, कोथावा क्षेत्र के जनकपुर मंदिर, हत्याहरण पौराणिक स्थल और 80 वर्ष पुराना शिव मंदिर, गिरधरपुर क्षेत्र का सूर्यकुंड मंदिर आदि श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हैं। विभाग ने इन प्राचीन तपोस्थलों का नए सिरे से विकास कराया है। इसके अलावा संपर्क मार्गों का निर्माण, श्रद्धालुओं के लिए रैन बसेरा, प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार, सेल्फी प्वाइंट, तालाबों का सौंदर्याकरण और अन्य पर्यटन सुविधाओं का विस्तार कराया गया है।

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नैमिषधाम में युवाओं व विदेशी पर्यटकों की रुचि बढ़ी है। धार्मिक टूर पैकेजों में शामिल होने से इसकी ख्याति उत्तर से दक्षिण भारत तक फैली है। श्रद्धालुओं के बढ़ने से होटल, प्रसाद, फूल-माला और परिवहन कारोबार में तेजी आई है। इससे लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। इन अल्पज्ञात स्थलों के पुनरुद्धार और समग्र नैमिषारण्य क्षेत्र के विकास के लिए प्रदेश सरकार की ओर से बजट और परियोजनाओं का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है।

आस्था और विकास साथ-साथ आगे बढ़ रहे

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह का कहना है कि बेहतर सुविधाओं और योजनाबद्ध विकास से नैमिषधाम वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। पर्यटन विभाग मिशन के रूप में अल्पज्ञात मंदिरों और परिक्रमा मार्ग के स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार करा रहा है। यहां आस्था और विकास साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।



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