दिन का तापमान 37.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। ऐसे में सोमवार को चटख धूप खिली रही। लगातार बढ़ती गर्मी से गेहूं की पिछेती फसल में दाना पतला होने की आशंका है। मसूर, चना और मटर की फसल भी प्रभावित हो सकती है।

किसानों का कहना है कि नवंबर-दिसंबर में बोई गई गेहूं की फसल में नुकसान हो रहा है। बालियां निकलने से पहले ही सूख रही हैं। दाना पतला होने से पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मार्च में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा है। जबकि गेहूं के लिए 20 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान नुकसानदायक होता है। इस समय अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इससे गेहूं का दाना पतला हो जाएगा। गेहूं के साथ मसूर, चना और मटर जैसी दलहनी फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। कृषि अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने बताया कि गेहूं को झुलसने से बचाने के लिए खेत में 0.2 प्रतिशत जिंक का छिड़काव करें। लगभग 200 लीटर पानी में 400 ग्राम जिंक घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।

गेहूं में अधिक सिंचाई की जरूरत

तापमान बढ़ने से अब किसानों को कम पैदावार के साथ ज्यादा खर्च का डर सताने लगा है। कई किसान ऐसे हैं जो डीजल पंप और बिजली का इस्तेमाल करते हैं। जमीन में नमी बनाए रखने के लिए उन्हें अब पहले से अधिक सिंचाई करनी पड़ रही है।

फसलों का रकबा

गेहूं 1,67,818

चना 1,36,450

मटर 83,000

सरसों 17,050

(नोट : रकबा हेक्टेयर में)

किसानों का यह है कहना

तापमान और चटख धूप से खेतों की नमी जा रही है। अब पहले से जयादा सिंचाई की जरूरत पड़ेगी। साथ ही उपज घटने का खतरा बढ़ गया है। – गोविंद सिंह यादव, राजापुर

बढ़ते तापमान से एक ओ उपज कम होने का खतरा है तो दूसरी ओर सिंचाई के लिए जेब पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। – राजेश दुबे, ढिकौली

इस बार खराब मौसम के कारण गेहूं की बोआई देर से हुई थी। अभी बालियों में दाना भरा नहीं है। अगर ऐसे ही रहा तो नुकसान होगा। बनमाली साहू, पुनावली कलां



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