हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का प्रारंभ 19 मार्च से हो गया। बृहस्पतिवार से वर्ष आरंभ होने के कारण हिंदू नववर्ष के राजा गुरु ग्रह ही होंगे। इस वर्ष रौद्र संवत्सर रहेगा और मंगल मंत्री होंगे। आमतौर पर हिंदू पंचांग में एक वर्ष में 12 महीने होते हैं, लेकिन विक्रम संवत 2083 में 13 महीने होंगे। इस वर्ष एक अधिक मास जुड़ रहा है। इस बार ज्येष्ठ मास दो बार आएगा।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस वर्ष गृह परिषद में राजा बृहस्पति होने से देशभर में आध्यात्मिक उन्नति और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में अकल्पनीय प्रगति होगी। विशेषकर कृषि और उत्पादन सेक्टर में रिकॉर्ड सफलता मिलने के योग हैं। चंद्रमा की स्थिति सफल मानसून की ओर संकेत कर रही है, लेकिन बुध के प्रभाव से महंगाई में तेजी आ सकती है। सोने-चांदी की कीमतों में भारी उछाल और उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। सरकारी राजकोष में वृद्धि होगी, लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, इस वर्ष गुरु और मंगल के प्रभाव के कारण मेष, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वालों को अनुकूल परिणाम मिलेंगे। कॅरिअर में उन्नति मिलेगी और धन लाभ के भी योग बनेंगे। रोजगार के नए साधन मिलेंगे। ग्रहों के अशुभ असर से बचने के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए। भगवान शिव, माता दुर्गा, भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।

संवत 2083 में दो अदृश्य सूर्यग्रहण

ज्योतिषाचार्य पुनीत वार्ष्णेय के अनुसार संवत 2083 में दो अदृश्य सूर्य ग्रहण और एक अदृश्य व एक दृश्य चंद्रग्रहण का योग है। 12 अगस्त 2026 दिन बुधवार और 06 फरवरी 2027 दिन शनिवार को दो सूर्य ग्रहण पड़ेंगे। ये दोनों भारत में दृश्य नहीं होंगे। 28 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार को आंशिक ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। 21 फरवरी 2027 दिन शनिवार को आंशिक ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण भारत में आंशिक दृश्य होगा। चंद्रग्रहण माघ पूर्णिमा मघा नक्षत्र में 02:42 से 06:43 तक लगेगा, जो अमेरिका, यूरोप व अफ्रीका, एशिया व भारत में दृश्य होगा।

 



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