प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस बार बुंदेलखंड को प्रतिनिधित्व मिल सकता है। इसे लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पैरवी कर रहे हैं। साथ ही निगमों और बोर्डों में भी बुंदेलखंड को स्थान मिलने के संकेत मिल रहे हैं।
आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सत्ताधारी भाजपा मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी ऐसे जनप्रतिनिधियों को आगे लाना चाहती है, जिनकी जनता के बीच मजबूत पकड़ हो, ताकि सकारात्मक संदेश दिया जा सके। वर्तमान में बुंदेलखंड के ललितपुर और बांदा से एक-एक राज्यमंत्री हैं। पार्टी ने संगठनात्मक दृष्टि से प्रदेश को छह क्षेत्रों में विभाजित किया है और मंत्रिमंडल में भी छह पद रिक्त बताए जा रहे हैं। ऐसे में हर क्षेत्र से एक प्रतिनिधि को मौका देने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें सात जिलों वाला बुंदेलखंड भी शामिल है।
लोकसभा चुनाव में झटका
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बुंदेलखंड की चार में से तीन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। जबकि 2014 से 2022 तक हुए चुनावों में क्षेत्र में पार्टी का दबदबा रहा। हालिया परिणामों ने पार्टी को नए सिरे से रणनीति बनाने के लिए मजबूर किया है।
झांसी को लंबे समय से इंतजार
झांसी से पिछले करीब 14 वर्षों से कोई भी जनप्रतिनिधि मंत्री नहीं बन सका है। 2007 में बसपा सरकार के दौरान यहां से दो मंत्री बनाए गए थे। इसके बाद 2012 की सपा सरकार और 2017 व 2022 में भाजपा सरकार बनने के बावजूद झांसी को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिल पाया, जबकि इन चुनावों में जिले की सभी सीटें भाजपा के खाते में गईं।
मंत्रिमंडल विस्तार में बुंदेलखंड से किसी जनप्रतिनिधि को मौका मिल सकता है। साथ ही निगमों और बोर्डों में भी क्षेत्र को प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। – अशोक राजपूत, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, कानपुर-बुंदेलखंड, भाजपा।
