यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘सलाह पर सवाल’ की कहानी। इसके अलावा ‘सीनियर डॉन के फंसाने की कहानी’ और ‘जांच से खुद पर न आ जाएं आंच’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…

सलाह पर सवाल

नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए सलाहकार रखे गए हैं, पर काम नहीं हो पा रहा है। चालू वित्त वर्ष में नई तकनीक पर आधारित तीन काम स्वीकृत हुए, पर एक में भी धन खर्च नहीं हो पाया। पूरा का पूरा बजट सरेंडर होने की नौबत आ गई। अब तो मातहत भी कहने लगे हैं कि ऐसी सलाह किस काम की! कहां गाड़ी अटकी? क्या इसके लिए भी कोई और सलाहकार रखना पड़ेगा।

सीनियर डॉन के फंसाने की कहानी

सरकारी तिजोरी भरने वाले एक महकमे में नित नए-नए खुलासे हो रहे हैं। तिजोरी में सेंध लगाने में माहिर सीनियर ‘डॉन’ के चंगुल में फंसने के बाद नई कहानी वायरल है। कहानी के मुताबिक ‘सीनियर डॉन’ को इसलिए फांसा गया ताकि नए को तैयार किया जा सके। महकमे के लोग ही फुसफुसा रहे हैं कि सीनियर डॉन ज्यादा ही ताकतवर हो गया था और आंखें तरेरने लगा था। इस वजह से साहबों की जेबें हल्की हो गई थीं। इसे बराबर करने के लिए राजधानी के करीबी जिले के छोटे डॉन को दो अफसरों ने अपना आशीर्वाद दे दिया। उसे बाजार में जमाने के लिए सीनियर को जाल में फांसा गया। अब जूनियर सौदे कर रहा है।

जांच से खुद पर न आ जाएं आंच

पिछले साल एक अधिकारी रिश्वतखोरी के आरोप में फंसे। निलंबित किए गए। एक केस भी दर्ज हुआ। तफ्तीश के लिए एसआईटी गठित हुई। एसआईटी ने बुलेट ट्रेन की रफ्तार से जांच की। साक्ष्य जुटाए और अधिकारी को भी आरोपी बना दिया। बस इंतजार था ऊपर से अनुमति मिलने की। एसआईटी ने शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर ली थी। तभी अचानक कोर्ट से केस ही खत्म हो गया। सारे सुबूत और तैयारी धरी की धरी रह गई। अब एसआईटी में शामिल अफसर थोड़े चिंतित हैं। डर है कि जिन साहब को आरोपी बनाया था, वह उनका नुकसान न कर दें क्योंकि उनकी वापसी हो चुकी है।



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