यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘लूट मिलै सो लूट’ की कहानी। इसके अलावा ‘सलामी वाले साहब को भारी पड़ी मनमानी’ और ‘कहीं उल्टा न पड़ जाए दांव’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…

लूट मिलै सो लूट

जमीन घोटाले की जो फाइल भू-अभिलेख से जुड़े महकमे ने बड़ी तेजी से आगे बढ़ाई थी, वो पिछले कई महीने से धूल फांक रही है। शुरुआत में कार्रवाई के लिए रिमाइंडर पर रिमाइंडर भेजे गए, अब कहा जा रहा है कि मामले को ठंडे बस्ते में डालने के निर्देश मिले हैं। ये निर्देश किसने दिए हैं, तो सिर्फ इतना ही कहा जा रहा है कि किसी उच्चाधिकारी के निर्देश हैं। अब न तो रिकवरी की कोई चर्चा है और न ही जमीन हथियाने वाले बिचौलियों के नाम खारिज करने की कोई कवायद। कुछ इस अंदाज में है : ..रामनाम की लूट है.. लूट सके सो लूट।

सलामी वाले साहब को भारी पड़ी मनमानी

प्रदेश में बड़े पैमाने पर आईपीएस अफसरों के तबादले हुए। इसमें एक नाम अवध क्षेत्र सलामी वाले कप्तान साहब का भी है। सलामी वाली रील उनकी पहचान बनी थी। साहब पर एक माननीय की कृपा बरसी थी तब कप्तानी मिली थी। लेकिन, साहब माननीय के ही करीबियों को नजरअंदाज करने लगे थे। ये बात ऊपर तक पहुंची। माननीय भी थोड़ा नाराज हुए। फिर क्या था साहब की कप्तानी गई और साइडलाइन कर दिए गए।

कहीं उल्टा न पड़ जाए दांव

भगवा दल में इन दिनों कुर्सीं बंटने की हलचल तेज है। कई नेता बड़ी कुर्सी पाने को बेताब हैं और इसके लिए हर जतन में जुटे हैं। मौजूदा संगठन में ‘भोपू’ का दायित्व संभाल रहे एक नेता जी को अब कैमरा के सामने गला फाड़ना रास नहीं आ रहा है। लिहाजा वह लंबे समय से संगठन के मुख्य पद पाने की लालसा पाले हुए हैं। इसके लिए उन्होंने संगठन के मुखिया की दौड़ में शामिल एक सांसद जी के खूब आगे-पीछे घूम और तेल लगाया, लेकिन मुखिया दूसरे बने गए तो सारी सेटिंग बिगड़ गई। ऐसे में ‘भोंपू’ अब नए सिरे से सेटिंग में जुटे हैं, लेकिन ऊपर सारी जानकारी है। ऐसे में सेटिंग गड़बड़ा न जाए, इसका डर सताने लगा है।



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