उत्तर प्रदेश में फर्जी फर्में बनाकर टैक्स चोरी करने वालों को पकड़ने के लिए राज्य का जीएसटी विभाग अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स का सहारा ले रहा है। इसमें मुख्य रूप से बाईफा (बिजनेस इंटेलीजेंस एंड फ्राड एनालिटिक्स) सॉफ्टवेयर की भूमिका सबसे अहम है।

बाइफा विभाग का सबसे शक्तिशाली डिजिटल हथियार है जो भारी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर संदिग्ध गतिविधियों को ”रेड फ्लैग” यानी चिह्नित कर देता है। यह टूल ट्रैक करता है कि क्या बिल केवल कागजों पर एक ही ग्रुप की कंपनियों के बीच घूम रहे हैं।

राज्य कर विभाग में जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बाइफा विभाग का सबसे शक्तिशाली डिजिटल हथियार है। यह सॉफ्टवेयर भारी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर संदिग्ध गतिविधियों को ”रेड फ्लैग” यानी चिह्नित कर देता है। यह टूल ट्रैक करता है कि क्या बिल केवल कागजों पर एक ही ग्रुप की कंपनियों के बीच घूम रहे हैं।

यह सिस्टम तुरंत अधिकारियों को अलर्ट भेज देता

यदि एक ही मोबाइल नंबर या पैन से कई फर्में रजिस्टर्ड हैं, तो यह सिस्टम तुरंत अधिकारियों को अलर्ट भेज देता है। यूपी का जीएसटी सिस्टम अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी के टोल प्लाजा से रीयल-टाइम डेटा के साथ एकीकृत है। अगर किसी व्यापारी ने ई-वे बिल तो बनाया है, लेकिन वह ट्रक किसी टोल प्लाजा से नहीं गुजरा, तो सिस्टम समझ जाता है कि केवल ”कागजी सप्लाई” हुई है।

उन्होंने बताया कि विभाग एआई का उपयोग करके करदाताओं के व्यवहार का विश्लेषण कर रहा है। यदि किसी नई फर्म का टर्नओवर बिना किसी ठोस आधार के अचानक करोड़ों में पहुंच जाता है, तो एआई टूल्स इसे संदिग्ध मानकर जांच के लिए भेज देते हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और असल में जमा किए गए टैक्स के बीच के अंतर को ये टूल्स पलक झपकते ही पकड़ लेते हैं।

 



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