यूपी में सत्ता के बदलाव की आहट ने माननीयों का धर्म-कर्म की तरफ रुझान बढ़ा दिया है। एक माननीय तो संकल्प लेने के लिए शक्तिपीठ तक पहुंच गए। वहीं, सलाखों वाले विभाग में तो सिपाहियों का दबदबा हो गया है। वहीं, एक बड़े साहब तो अपने ही महकमे से बेखबर हैं। पढ़ें, सियासत और अफसरशाही से जुड़े ये किस्से: 

विरोधी पर जीत का जाप

सूबे की सत्ता में बदलाव की आहट ने कई माननीयों में धार्मिक ज्वार पैदा कर दिया है। ऐसे ही एक माननीय हैं जो महाकाल और उनके पास में ही स्थित विरोधियों पर जीत दिलाने वाली देवी की उपासना में जुट गए हैं। उनकी इस आस्था का खुलासा तब हुआ जब वह खुद एक दिन संकल्प लेने शक्तिपीठ पहुंचे थे। संयोग से उनके एक परिचित मिल गए तो माननीय ने मुंह पर गमछा बांधकर पहचान छिपाने की कोशिश की लेकिन इतने बड़े नेता हैं तो पहचान कैसे छिपेगी। बाद में पुरोहित ने बताया कि माननीय उच्चाटन जाप करा रहे हैं।

सिपाहियों का दबदबा

सलाखों वाला विभाग अलग ही ट्रैक पर है। जहां से सिपाहियों का तबादला, पदोन्नति का काम होता है, उसकी जिम्मेदारी खुद ही उठा रखी है। मतलब दो-तीन सिपाही खुद ही बाबू बन गए। वह खुद अपने लोगों का तबादला व अन्य कार्य करने में जुटे हैं। इससे बाबू बहुत परेशान हैं। इसके पीछे की वजह साहब की शह है। यह शह तीन चार सिपाहियों को दी गई। महकमे के कर्मचारी बेहद परेशान हैं। चर्चा है कि इसके पीछे जेब गरम करने का मामला है। इसलिए साहब ने सबको सेट कर रखा है।

अपने महकमे से बेखबर साहब

प्रदेश में युवाओं को रोजगार देने वाले एक बोर्ड के बड़े साहब अपने ही महकमे से बेखबर हैं। उन्हें बोर्ड में काफी उम्मीदों से महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया लेकिन वह अपने में व्यस्त रहते हैं। हालत यह है कि युवाओं से जुड़ी जो महत्वपूर्ण सूचनाएं वेबसाइट व सार्वजनिक मंच पर एक दिन पहले ही आ जाती हैं, वह समय मिलने पर उसे एक दिन बाद साझा करते हैं। इसे लेकर विभाग में भी चर्चाएं आम हैं कि साहब अपने ही महकमे की खबर से बेखबर रहते हैं।

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