पुलिस ने एक करोड़ की जीएसटी चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए बीटेक पास सरगना को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया। आरोपी वीरेंद्र कुमार, वर्तमान में रोहिणी (दिल्ली) में रह रहा था, जबकि मूल रूप से सिरसा (हरियाणा) का निवासी है। वह गरीब और नशे की लत वाले युवकों को प्रलोभन देकर उनके नाम पर सिम कार्ड लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और इनके जरिये बोगस फर्म बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम करता था।
पुलिस ने आरोपी के पास से 39 मोबाइल सिम, दो लैपटॉप और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। आरोपी देश के विभिन्न राज्यों में करीब 80 फर्जी फर्म बनाकर विभाग को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंचा चुका है। सहायक पुलिस अधीक्षक अरीबा नोमान ने बृहस्पतिवार को बताया कि नवाबाद थाने में राज्यकर अधिकारी अनिल कुमार यादव की तहरीर पर पिछले साल 10 अगस्त को मामला दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि हाथरस निवासी दुर्गेश कुमार के नाम से झांसी के तालपुरा क्षेत्र में डीके इंटरप्राइजेज के नाम से फर्जी जीएसटी फर्म पंजीकृत कराई गई थी। मौके पर जांच में मकान मालिक ने ऐसी किसी फर्म या व्यक्ति की जानकारी से इन्कार कर दिया, जिसके बाद पंजीकरण निरस्त कर दिया गया।
जांच में पता चला कि इस फर्म के जरिये करीब 5.5 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार दिखाकर लगभग एक करोड़ रुपये का आईटीसी क्लेम किया गया। इसके बाद पुलिस ने जीएसटी विभाग की मदद से जांच तेज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ में सामने आया कि वह झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब युवकों को 300-400 रुपये का लालच देकर उनके नाम से सिम लेता था और फर्जी फर्म बनाकर टैक्स चोरी करता था। पुलिस गिरोह के अन्य गुर्गों की तलाश कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा है। पुलिस इस मामले में दो अन्य आरोपियों इशु और सरकार की तलाश कर रही है। जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।
पहले भी हो चुके हैं बड़े खुलासे
पुलिस के अनुसार, इससे पहले प्रेमनगर और कोतवाली क्षेत्र में 30-40 करोड़ रुपये के फर्जी फर्म प्रकरण में दो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। नवाबाद क्षेत्र का यह तीसरा बड़ा मामला है, जिसमें गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया गया है।
गिरोह की चेन लंबी, जांच जारी
जीएसटी में फर्जी पंजीकरण कर बोगस फर्मों के जरिये हर साल करोड़ों रुपये की राजस्व क्षति हो रही है। झांसी परिक्षेत्र में ऐसे नौ बड़े मामले दर्ज हैं। महोबा और हमीरपुर के बाद झांसी में भी लगातार बड़े खुलासे हो रहे हैं। अभी हमीरपुर और चित्रकूट के चार मामलों का खुलासा होना शेष है, जिनकी जांच जारी है। ऐसे में फर्जी फर्म बनाने वाले गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है।
मामले की जानकारी देतीं सहायक पुलिस अधीक्षक अरीबा नोमान…
