यूपी में अफसरशाही और सियासत में अजब-गजब खेल चलते रहते हैं। वहीं, सियासी दलों के बयानवीर कई बार ऐसे बयान भी दे देते हैं जिसमें अफसर भी उलझकर रह जाते हैं। एक विभाग में स्थानीय अभियंता गजब तरह का खेल रहे हैं तो प्रदेश की औद्योगिक नगरी में नेताओं के बयान से खाकी वर्दी वाले भी परेशान हैं। वहीं, एक कप्तान की कप्तानी छिनने का किस्सा भी बड़ी चर्चा में है। पढ़ें, ये किस्से
करोड़ों का पेमेंट, फिर डिबार
एक विभाग में स्थानीय अभियंता भी गजब का खेल कर रहे हैं। वित्त वर्ष के अंतिम दिन जिस ठेकेदार को कई करोड़ का भुगतान किया, उसे ही दो दिन बाद डिबार कर दिया। काम न उसने पेमेंट से पहले ठीक किया था और न बाद में किसी काम को आगे बढ़ाया। अभियंताओं के इस कारनामे पर नजर रखी जा रही है। देखते हैं कि यह नजर किस नतीजे पर पहुंचती है?
जंग में फंसने से बचे
प्रदेश की औद्योगिक नगरी में थोड़ा अशांति क्या फैली, सरकार के बयानवीर मामला पड़ोसी मुल्क तक ले गए। बिना सोचे-समझे ऐसा बयान दे डाला, जिसे सुनकर खाकी वाले माथा पकड़कर बैठे हैं। सूझ नहीं रहा कि इसका लिंक पड़ोसी मुल्क से कैसे निकालें और उसे साबित किस तरह करें? एक पूर्व अधिकारी का धैर्य तो इस कदर जवाब दे गया कि उन्होंने बयानवीरों को थोड़ा आगे बढ़कर अमेरिका-ईरान की जंग से इसे जोड़ने का सुझाव दे डाला। मजाकिया अंदाज में बोले कि जब लंतरानी ही करनी है तो चंद कदम आगे बढ़ जाते या जंग में फंसने के डर से नजदीक ही हमला करना ठीक समझा।
यूं छिन गई कप्तानी
कुछ दिन पहले एक पुलिस अधिकारी की कप्तानी छिन गई। वहां दूसरे अधिकारी की तैनाती की गई। यह बदलाव अचानक हुआ। उस जिले में एक दिन पहले प्रशासन के एक अफसर पर निलंबन की कार्रवाई की गई थी। मामला जमीन विवाद से संबंधित था। कप्तान पर दबाव था कि वह एक पक्ष पर कार्रवाई करे जो गलत था। उस पक्ष को इरादतन निशाना बनाया जा रहा था। कप्तान ने ऐसा करने से मना कर दिया था। फिर क्या था, कप्तानी गंवानी पड़ी।
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