उत्तर प्रदेश में बैंकिंग गतिविधियों की गति बढ़ने के बाद भी पांच जिले अयोध्या, आजमगढ़, प्रतापगढ़, बलिया और उन्नाव ऋण वितरण के मामले में पिछड़ रहे हैं। इन जिलों का क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो 40 प्रतिशत से नीचे है। इनमें अयोध्या का सीडी रेशियो करीब 36.84 प्रतिशत, आजमगढ़ का 38, प्रतापगढ़ का 38.85, बलिया का 35.29 और उन्नाव का 33.37 प्रतिशत है। जबकि राज्य का औसत सीडी रेशियो दिसंबर 2025 तिमाही में 60.39 प्रतिशत तक पहुंच गया है।


बैंकों द्वारा शासन को भेजी दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश का सीडी रेशियो सितंबर 2025 के 59.56 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर 2025 में 60.39 प्रतिशत हो गया है। इस तरह राज्य ने 60 प्रतिशत का लक्ष्य पार कर लिया है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति ने मार्च 2026 तक 62 प्रतिशत और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 65 प्रतिशत सीडी रेशियो हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

तिमाही में सीडी रेशियो में वृद्धि हुई

रिपोर्ट के मुताबिक सभी आठ लीड बैंकों में दिसंबर तिमाही में सीडी रेशियो में वृद्धि हुई है। यूनियन बैंक और सेंट्रल बैंक में सुधार का रुझान दिखा, जबकि तिमाही आधार पर भारतीय स्टेट बैंक और केनरा बैंक का प्रदर्शन बेहतर रहा। निजी क्षेत्र के बैंकों में साउथ इंडियन बैंक का सीडी रेशियो 40 प्रतिशत से नीचे मिला। इसका कारण प्रदेश में शाखाओं की कमी और डिपॉजिट आधारित नेटवर्क बताया गया। इस पर समिति ने 40 से 50 प्रतिशत सीडी रेशियो वाले बैंकों को भी 50 फीसदी के ऊपर ले जाने के लिए रणनीति बनाने के निर्देश दिए हैं।

शीर्ष 10 जिलों के उच्च सीडी रेशियो पर उठे सवाल

रिपोर्ट में जिला स्तर पर शीर्ष 10 जिलों के उच्च सीडी रेशियो पर भी सवाल उठाए गए हैं। इस पर राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने टिप्पणी की, कहा कि कई बार कम डिपॉजिट और सीमित एडवांस की वजह से सीडी रेशियो ज्यादा दिखता है। ऐसे में वास्तविक ऋण वृद्धि पर ध्यान देना जरूरी है। समिति ने स्पष्ट किया कि कम सीडी रेशियो वाले जिलों में बैंकिंग पहुंच बढ़ाने, ऋण वितरण तेज करने और स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं लागू करने पर विशेष फोकस किया जाएगा।



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