उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की बड़गांव शाखा में सामने आए 21.47 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी शुरू कर दी है। ईडी ने मामले में बैंक प्रबंधन से आवश्यक दस्तावेज तलब किए हैं और वित्तीय लेन-देन तथा संदिग्ध खातों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।
ईडी द्वारा जांच शुरू किए जाने की पुष्टि इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने की। सोमवार को आरोपी दुष्यंत प्रताप सिंह की याचिका पर सुनवाई होनी है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं। वैसे ईडी की एंट्री के बाद यह मामला अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह गया है। मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के पहलुओं की जांच में यदि संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि होती है तो आरोपियों पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। जांच एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई से बड़े खुलासे संभव हैं।
ये भी पढ़ें – सीएम योगी बोले- सदियों तक आक्रमण झेल कर भी दृढ़ता से खड़ी है सनातन आस्था जबकि आक्रांता मिट गए
ये भी पढ़ें – महिला आरक्षण बिल पर अखिलेश ने बीजेपी को घेरा, बोले- भाजपा ‘नारी’ को ‘नारा’ बनाने की कोशिश में थी
ऑडिट में खुला था घोटाला
बैंक में हुए इस घोटाले का खुलासा चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑडिट रिपोर्ट से हुआ। दो जनवरी 2026 को प्रस्तुत रिपोर्ट में ऋण वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर हुईं। जांच में सामने आया कि ऋण वितरण से पहले आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया गया। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने अपने परिजनों और परिचितों के साथ मिलकर गिरोह बनाया और खातों में धनराशि ट्रांसफर कर उसे निकाल लिया। इसके अलावा बैंक के पांच आंतरिक खातों से 46.13 लाख रुपये अनधिकृत रूप से निकालकर अन्य खातों में स्थानांतरित किए गए। वहीं, 205 खाताधारकों के ऋण और बचत खातों से कुल 21.47 करोड़ रुपये की निकासी की गई।
खाताधारकों के साथ भी धोखाधड़ी
मामले में कई खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी की बात भी सामने आई है। एक खाताधारक ने नौ लाख रुपये का ऋण लिया था और नियमित किस्त जमा कर रहे थे, लेकिन बाद में उनके नाम पर 31 लाख रुपये का ऋण दर्शाया गया। इस तरह का खेल करीब चार वर्षों तक चलता रहा। 12 जनवरी को कोतवाली नगर में दर्ज कराई गई प्राथमिकी की जांच पुलिस कर रही है। अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश जारी है।
