नगर निगम में सोमवार को हुई सदन की बैठक में महानगर पेयजल योजना को लेकर पार्षदों के निशाने पर जल निगम और जल संस्थान के अफसर रहे। पाइप लाइन डालने में भ्रष्टाचार होने से लेकर पार्षदों ने अफसरों पर कागजों में ही पानी पहुंचाने का आरोप लगाया। जनप्रतिनिधियों ने भी अफसरों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 2022 की योजना 2026 तक पूरी नहीं हुई है।
करीब चार महीने बाद सोमवार को हुई नगर निगम की कार्यकारिणी की बैठक तय समय से 20 मिनट देरी से शुरू हुई। सदर विधायक रवि शर्मा ने कहा कि वार्डों के जिन इलाकों में पाइपलाइन नहीं डली है, उसे लिखकर दें। जब योजना पूर्ण हो जाएगी तो फिर पाइपलाइन डलवाने में परेशानी होगी। विधायक के इतना बोलते ही पार्षद जल निगम और जल संस्थान के अफसरों को घेरने लगे।
यह बोले पार्षद
पार्षद उमेश जोशी ने कहा कि उनके वार्ड में 20 जगहों पर टैंकर से पानी की आपूर्ति की जा रही है। पार्षद प्रियंका साहू ने कहा कि वार्ड 47 में दो साल पहले पाइप लाइन डाली गई थी। अब तक पानी नहीं आ रहा है। पार्षद बालस्वरूप साहू और ममता पाल ने कहा कि उनके वार्ड में पाइपलाइन ही नहीं डाली गई है। टैंकर से पानी की आपूर्ति हो रही है।
पार्षद अरविंद झा ने कहा कि नई टंकी से कनेक्शन दे दिया गया है, जिससे पानी नहीं आ रहा है। पार्षद प्रवीण लखेरा ने कहा कि उनके वार्ड में एक दिन छोड़कर पानी आ रहा है। पार्षद नरेंद्र किशोर ने कहा कि रात में तीन बजे नल से पानी आता है। दिनेश प्रताप सिंह ने भी कहा कि चमनगंज आदि में रात दो बजे नल से पानी आने पर लोगों को जगना पड़ता है।
पार्षद मुकेश सोनी ने जल निगम के अधिशासी अभियंता मुकेश पाल का नाम लेकर कहा कि उन्हें कोई मतलब नहीं है। वह कागजों में ही काम करवा रहे हैं। पार्षद अमित राय ने कहा कि जो मुख्य पाइपलाइन डाली गई है, उसकी क्षमता 195 एमएलडी है। मौजूदा समय में 45 एमएलडी पानी आने पर ही जगह-जगह लीकेज हो रहे हैं। जब पूरी क्षमता से पानी छूटेगा, तब क्या होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पाइपलाइन डालने में भ्रष्टाचार हुआ है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए।
मेयर बिहारी लाल आर्य ने कहा कि इस मामले को वह शासन स्तर तक पहुंचाएंगे। कुछ पार्षदों ने नल से गंदा पानी आने का भी मुद्दा उठाया। प्रवीण लखेरा ने कहा कि एक हफ्ते में उनके वार्ड में पानी की समस्या का समाधान नहीं होगा तो वह लोगों के साथ आंदोलन करेंगे। कहा कि छात्र राजनीति से निकला हूं। इसलिए आंदोलन का अनुभव भी है। अगर एक बार आंदोलन शुरू कर दिया तो फिर पीछे नहीं हटूंगा।
पार्षदों के सवालों पर जल निगम के अधिशासी अभियंता मुकेश पाल ने कहा कि दो चरणों में पाइप लाइन डालने का काम चल रहा है। पहले चरण में 267 में 265 किलोमीटर लाइन डाली जा चुकी है। 13 जोन में पानी की आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है। एक जगह एनएचएआई की ओर से कराए जा रहे काम के दौरान पाइप लाइन टूट गई थी, जो एक हफ्ते में दुरुस्त हो जाएगी और 2800 घरों में पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। वहीं, जल संस्थान के सहायक अभियंता प्रदीप जादौन ने कहा कि जहां भी पेयजल से जुड़ी समस्याएं हैं, उनका समाधान किया जा रहा है। बैठक में एमएलसी रमा निरंजन भी मौजूद रहीं।
जनप्रतिनिधियों ने भी दिखाए तेवर
जल संस्थान और जल निगम के अफसरों के गोलमोल जवाब पर सदर विधायक बोले कि शराफत से बात कर रहे हैं तो समझ नहीं आ रहा। अगर बजट चाहिए तो बताओ। शासन स्तर पर पैरवी करके मंगवाएंगे लेकिन काम तो पूरा करो। मेयर ने भी कहा कि यह पेयजल योजना तीन साल में पूरी होनी थी लेकिन सात साल बीच चुके हैं।
एमएलसी रामतीर्थ सिंघल ने भी कहा कि 2022 में पूरी होने वाली पेयजल योजना 2026 तक पूर्ण नहीं हो पाई। 20 फीसदी पाइप लाइन भी मानक अनुरूप डाली गई हो तो बताओ। जिस भी ठेकेदार को ये काम मिला था उसने पेटी कांट्रैक्ट पर तीन बार काम दे दिया। पाइप लाइन डालने के लिए सड़क की खुदाई कर दी गई। फिर मानक अनुरूप मरम्मत नहीं कराई।
नाली में पाइप लाइन डालने पर भड़के मेयर, पार्षद बोले- कनेक्शन नहीं फिर भी आया बिल
पार्षद नरेंद्र नामदेव ने कहा कि नालों में पाइपलाइन डाल दी गई है। इस पर मेयर भड़क गए। इंदौर की घटना का जिक्र करते हुए बोले कि तय हुआ था कि कहीं पर भी नाले में पाइप लाइन नहीं डाली जाएगी। जो डली है, उनमें से कितनी बाहर निकलवाने की कार्रवाई की गई। पार्षद राहुल कुशवाहा ने कहा कि तीन साल का 1.94 लाख रुपये का एक व्यक्ति को जलकर का बिल भेज दिया, जो यहां रहता भी नहीं है। उसका पेयजल का कनेक्शन भी नहीं है।
नगर निगम सदन की बैठक…
