मेडिकल कॉलेज में सीसीटीवी से कड़ी निगरानी के दावे जमीनी हकीकत में दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। हालात यह हैं कि कुल 139 कैमरे बंद पड़े हैं और जिम्मेदार अधिकारी इसकी स्पष्ट जवाबदेही तक तय नहीं कर पा रहे हैं।
सीसीटीवी कैमरों के कंट्रोल रूम के कर्मचारियों के मुताबिक पांच मंजिला सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में लगे 122 कैमरों में से केवल 15 ही चालू हैं और वे भी सिर्फ ग्राउंड फ्लोर तक सीमित हैं। ब्लॉक के कंट्रोल रूम पर ताला लगा रहता है, जबकि लिफ्टों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी कैमरे बंद हैं, जहां दिनभर सैकड़ों लोगों की आवाजाही रहती है। इसी तरह पर्चा काउंटर, ओपीडी और वार्डों में लगे 86 कैमरों में से 32 खराब हैं। इनका कंट्रोल रूम गेट नंबर-एक के पास स्थित है, लेकिन निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं है। जिम्मेदारी को लेकर अधिकारियों के बीच असमंजस बना हुआ है।
इनका यह है कहना
नोडल अधिकारी डॉ. रामबाबू का कहना है कि उनके पास केवल ओपीडी और वार्डों के कैमरों की निगरानी है, जबकि सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक उनके दायरे में नहीं आता। दूसरी ओर, ब्लॉक प्रभारी डॉ. सुधीर कुमार कैमरों की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी पर डालते हैं। वहीं मेडिसिन विभागाध्यक्ष ने इस संबंध में किसी भी प्रकार का चार्ज होने से इन्कार किया है।
इस संबंध में सीएमएस डाॅ. सचिन माहुर का कहना है कि सीसीटीवी कैमरों के नोडल अधिकारी डाॅ. रामबाबू सिंह ही हैं। खराब कैमरों को सुधरवाएं।
