प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब झांसी में भी दिखाई देने लगा है। ईंधन की खपत कम करने के उद्देश्य से मेयर, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी ने अपने-अपने काफिले से एस्कॉर्ट गाड़ियां हटाने का फैसला लिया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी अपने काफिलों में वाहनों की संख्या कम कर सकते हैं।



जनपद में सांसद, मेयर, मंडलायुक्त, आईजी, डीएम और एसएसपी समेत कई जनप्रतिनिधियों व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एस्कॉर्ट वाहन चलते हैं। हालांकि अब ईंधन बचत को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू हो गई है। मेयर बिहारी लाल आर्य ने अपने काफिले से एस्कॉर्ट हटाने का निर्णय लिया है। शुक्रवार से वह केवल एक कार से ही चलेंगे।इसी तरह मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे ने भी बुधवार से एस्कॉर्ट हटाकर एक वाहन से चलना शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने भी शुक्रवार से सिर्फ एक कार से आवागमन करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों की इस पहल को आम लोगों के बीच सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।झांसी में रोज 20 लाख लीटर ईंधन की खपत : जनपद में करीब 200 पेट्रोल पंप संचालित हैं। पेट्रोल पंप एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार जिले में प्रतिदिन लगभग 20 लाख लीटर पेट्रोल और डीजल की खपत होती है। इसमें करीब पांच लाख लीटर पेट्रोल और 15 लाख लीटर डीजल शामिल है। हर वर्ष ईंधन की खपत में चार से पांच फीसदी तक वृद्धि दर्ज की जा रही है।



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