लखनऊ। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर ऑडिटोरियम में लेखक एवं गीतकार मनोज मुंतशिर शुक्ला के नाटक कृष्ण राधा से रणभूमि तक का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से हर किसी का मन मोह लिया। नाटक के जरिये जीवन मूल्यों, कर्तव्यनिष्ठा एवं धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कलाकारों के शानदार अभिनय से पौराणिक संस्कृति जीवंत हो उठी। नाटक में राधा-कृष्ण की कहानी बरसाना की गलियां और रणभूमि सब मंच पर उतर आए। पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं, मुख्य अतिथि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नाटक के निर्माता नीलम मुंतशिर और मनोज मुंतशिर को इस सराहनीय प्रयास के लिए बधाई दी और कलाकारों के हुनर को सराहा। उन्होंने भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के संरक्षण में नाटकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। कहा कि विद्यालयों में पौराणिक कथाओं पर आधारित छोटे-छोटे नाटकों का मंचन किया जाना चाहिए। बच्चे पढ़कर उतना नहीं सीख पाते, जितना देखकर सहज रूप से आत्मसात कर लेते हैं। महाभारत के कर्ण-अर्जुन प्रसंग और फिल्म कृष्णावतारम में श्री सत्यभामा के शौर्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी प्रस्तुतियां नई पीढ़ी को सही दिशा और प्रेरणा देती हैं।

कृष्ण राधा से रणभूमि तक नाटक में जीवंत हुई पौराणिक संस्कृति

कृष्ण राधा से रणभूमि तक नाटक में जीवंत हुई पौराणिक संस्कृति

कृष्ण राधा से रणभूमि तक नाटक में जीवंत हुई पौराणिक संस्कृति

कृष्ण राधा से रणभूमि तक नाटक में जीवंत हुई पौराणिक संस्कृति

कृष्ण राधा से रणभूमि तक नाटक में जीवंत हुई पौराणिक संस्कृति
