महाराजा गंगाधर राव एवं रानी लक्ष्मीबाई का विवाह 19 मई 1842 को हुआ था। विवाहोत्सव की 184 वीं वर्षगांठ पर दो दिवसीय भव्य कार्यक्रम 18 एवं 19 मई को होंगे। महाराष्ट्रीय गणेश मंदिर में मेहंदी की रस्म एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। शोभायात्रा में पारंपरिक महाराष्ट्रीय एवं बुंदेली परिधानों में लोग उत्साह से शामिल होंगे। विवाहोत्सव के लिए लोगों को पीले चावल बांटे जा रहे हैं।

बुंदेली वाद्य यंत्रों रमतूला और शहनाई की गूंज लोगों को मंत्रमुग्ध करेगी। शोभायात्रा का जगह – जगह स्वागत होगा। राजा गंगाधर राव एवं रानी लक्ष्मीबाई के विवाहोत्सव कार्यक्रम को लेकर लोगों में उत्साह छाया है। शनिवार को आयोजन समिति ने गंधीगर का टपरा, सर्राफा बाजार, मानिक चौक, बड़ा बाजार सहित विभिन्न प्रमुख बाजारों में नगरवासियों को विवाहोत्सव में शामिल होने के लिए पीले चावल एवं निमंत्रण पत्र दिए। इस अवसर पर गजानन खानवलकर, अरविंद ओझा, पीयूष रावत, मनमोहन गेडा, मोहन नेपाली, रवीश त्रिपाठी, अशोक अग्रवाल, राम किशन निरंजन, उज्जवल देवधर, मुकेश सिंघल, मिलिंद देसाई, निशिकांत भागवत, सुदर्शन शिवहरे आदि मौजूद रहे।

घरों में जलाए जाएंगे दीप

रानी लक्ष्मीबाई एवं राजा गंगाधर राव के विवाहोत्सव पर भव्य कार्यक्रम होगा। घरों में दीप जलाए जाएंगे। हर साल की तरह इस साल भी विवाहोत्सव विशेष रहेगा। मेधा देसाई

सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे

महारानी लक्ष्मीबाई एवं महाराजा गंगाधर राव की शादी की सालगिरह 19 मई को धूमधाम से मनाई जाती है। गणेश मंदिर में मोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। दीप्ति किलपन

सभी वर्गों के लोग शामिल होंगे

राजा एवं रानी के विवाहोत्सव में महाराष्ट्रीय एवं बुंदेली संस्कृति की मनमोहक छटा देखने को मिलती है। समाज के सभी वर्गों के लोग उत्साह से शामिल होते है। प्रियता रावत



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