वीरांगना लक्ष्मीबाई और महाराजा गंगाधर राव की शादी की 184वीं वर्षगांठ धूमधाम से झांसी वालों ने मनाई। लोगों में इसको लेकर काफी उत्साह नजर आया। छात्राएं महारानी के वेश में पहुंची थीं। मंगलवार शाम को लक्ष्मी व्यायाम मंदिर से परंपरागत तरीके से बरात निकाली गई। गाजे-बाजे और बुंदेली वाद्यों के साथ निकली बरात में गाते-नाचते लोगों का हुजूम शामिल था। प्राचीन गणेश मंदिर पहुंचने पर यहां विवाह की प्रतीकात्मक रस्में भी कराई गईं।
शाम करीब पांच बजे लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में पूजन-अर्चन के बाद मराठी परंपरा के साथ राजा श्रीमंत गंगाधर राव के स्वरूप को महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी सचिव गजानन खानवलकर एवं उज्ज्वल देवधर ने राजसी पगड़ी पहनाई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महिलाओं ने आरती एवं तिलक किया। उनके बग्घी में सवार होने के बाद राजसी ठाट-बाट के साथ बरात निकली। राजा एवं रानी के जयकारे करते हुए बराती गणेश मंदिर की ओर चल पड़े। रास्ते भर महिलाएं एवं पुरुष विवाह गीतों पर नाचते-गाते चल रहे थे। बरात के साथ बग्घी एवं घोडों पर राजा मर्दन सिंह, दतिया नरेश, सुंदर-मुंदर के स्वरूप भी शामिल थे। बरात पंचकुइया चौराहा, कोतवाली, सिंधी चौराहा, मानिक चौक, सर्राफा बाजार, गंधीगर का टपरा होते प्राचीन गणेश मंदिर पहुंची। यहीं महारानी लक्ष्मीबाई का विवाह हुआ था। बरात के पहुंचने पर घराती पक्ष ने पुष्प वर्षा करके बरातियों का स्वागत किया।
