जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनीं हुई है। प्रधानों का कार्यकाल चार दिन बाद समाप्त हो जाएगा। ऐसे में अब कौन ग्राम पंचायतों की बागडोर संभालेगा, इसका भी कोई निर्णय अभी तक नहीं हुआ है। फिलहाल 2027 के विधानसभा चुनावों में प्रधानों की नाराजगी से सत्तापक्ष को बचाने के लिए है, उनको ही प्रशासक बनाने पर भी मंथन चल रहा है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का कार्यकाल प्रशासन पहली बैठक से मान रहा है। जिला पंचायत की पहली बैठक 11 जुलाई 2021 को हुई जबकि क्षेत्र पंचायत की पहली बैठक 19 जुलाई 2021 और ग्राम पंचायत की पहली बैठक 26 जुलाई 2021 को हुई थी। ऐसे में जिला पंचायत का कार्यकाल 11 जुलाई, क्षेत्र पंचायत का कार्यकाल 19 जुलाई और ग्राम पंचायत का कार्यकाल 26 जुलाई को समाप्त हो जाएगा।
सबसे पहले ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में जिले के करीब 496 ग्राम पंचायतों के प्रधानों में असमंजस की स्थिति बनीं हुई है। इससे पहले कार्यकाल समाप्त होने पर ग्राम पंचायतों के संचालन के एडीओ पंचायत व पंचायत सचिवों को जिम्मेदारी सौंपी दी जाती रही है। इस बार प्रधान संगठन भी चुनाव न हो पाने की स्थित में ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक पद की जिम्मेदारी सौंपे जाने की मांग कर रहे हैं। शुक्रवार को पंचायत राज विभाग कार्यालय में प्रधानी को लेकर आदेश आने का इंतजार रहा मगर देर शाम तक कोई आदेश नहीं आया।
बंद हो सकते हैं डोंगल से कामकाज
कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों के सारे अधिकार खत्म हो जाएंगे। उनकी ओर से किसी भी मद में भुगतान या कार्य नहीं कराया जा सकेगा। इससे गांव का विकास भी थम जाएगा। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीणों को उठानी पड़ेगी। प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा नहीं तो डोंगल से कार्य बंद हो जाएगा।
इनका यह है कहना
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अभी तक कोई आदेश-निर्देश शासन से नहीं आया है। कार्यकाल समाप्त होने की सूचना शासन को भेजी जा चुकी है। जैसा आदेश आएगा, उसी के अनुसार कार्य किया जाएगा। डॉ. बाल गोविंद श्रीवास्तव, डीपीआरओ
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 को समाप्त हो रहा है। इसको लेकर शासन की ओर से कोई निर्देश अभी तक जारी नहीं किया गया है। ग्राम पंचायतों में प्रशासक किसी भी दशा में स्वीकार नहीं होगा। प्रधानों का ही कार्यकाल बढ़ना चाहिए। प्रदीप टांडा, मंडल अध्यक्ष, राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन
