प्रदेश में रात में बिजली की मांग दोगुनी हो जाती है। रात में सभी फीडर ओवरलोड हो रहे हैं, जबकि इस वक्त मैन पॉवर आधी रहती है। ऐसे में उपकेंद्रों के प्रभारी सहायक अभियंताओं की चुनौती बढ़ जाती है। प्रदेश में उपकेंद्रों की जिम्मेदारी निभा रहे सहायक अभियंताओं ने बताया कि संविदाकर्मियों की संख्या में कटौती कर दी गई है। शहरी इलाके में पहले बिजली की निगरानी के लिए संविदा पर 36 कर्मचारी लगाए जाते थे, जिसे घटाकर 22 कर दिया गया है। इसी तरह ग्रामीण इलाके में 20 की जगह 12 कर्मचारी हैं। दिन में राजस्व वसूली, कागजात ले जाने व अन्य कई त रह के कार्य रहते हैं। ऐसे में दिन में संख्या अधिक रखी जाती है। रात में यह संख्या दो से तीन ही रहती है। रात के वक्त फाल्ट आने पर कर्मचारियों को एक स्थान पर भेजा जाता है। वहां से आने जाने और मरम्मत कार्य करने में करीब दो से तीन घंटे लग जाते हैं। ऐसे में दूसरे स्थान पर ये कर्मचारी तीन घंटे बाद ही पहुंच पाते हैं। इतना ही नहीं गर्मी के मौसम में अतिरिक्त मैन पावर की भी व्यवस्था की जाती थी, लेकिन इस वर्ष नहीं की गई है।



मैन पावर बढ़ाने से ही दूर होगा संकट


उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली संकट दूर करने के लिए मैन पावर बढ़ाना होगा। निलंबित अभियंताओं को बहाल कर उपकेंद्रों पर जल्द से जल्द लगाने की जरूरत है। सब-स्टेशनों पर पर्याप्त गैंग उपलब्ध होंगो त भी बिजली व्यवस्था सुचारू होगी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की संख्या कम करने के बाद हर सब-स्टेशन पर केवल तीन गैंगों को 24 घंटे के लिए तैनात किया गया है। यानी प्रत्येक 8 घंटे की शिफ्ट में केवल एक गैंग कार्य करेगी। किसी भी सब-स्टेशन पर न्यूनतम 3 से लेकर आठ फीडर होते हैं। यदि एक साथ दो या तीन फीडरों पर ब्रेकडाउन हो जाए तो एक अकेली गैंग सभी स्थानों पर नहीं पहुंच सकती है। प्रदेश में शनिवार को अधिकतम मांग 30475 मेगावाट रही वर्ष 2025-26 में अधिकतम मांग 31,486 तक पहुंच चुकी है। इससे साफ है कि अधिकतम मांग पूरी करने में कोई समस्या नहीं है। समस्या मैन पावर की है।



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