यूपी के महोबा में देशी-देशावरी पान के बरेजे तेजी से खत्म हो रहे हैं। तालाबों और बरेजों की कमी बुंदेलखंड के पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ रही है। वनस्पति वैज्ञानिकों का तर्क है कि हरियाली कम होने से तापमान में लगातार वृद्धि होगी। यह स्थिति किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है।

महोबा में कभी 550 एकड़ में पान की खेती होती थी। अब यह घटकर केवल 17 से 20 एकड़ में सिमट गई है। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राम सेवक चौरसिया ने इसे अनदेखी का परिणाम बताया। 



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