त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आहट के बीच जिले की क्षेत्र पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। शासन से विकास कार्यों के लिए मिली करोड़ों रुपये की धनराशि अब भी खातों में पड़ी हुई है, लेकिन जमीनी स्तर पर खर्च नहीं हो सकी। हालत यह है कि जिले की आठ क्षेत्र पंचायतों को मिले करीब 18 करोड़ रुपये में से सिर्फ 2.86 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके हैं। खराब प्रदर्शन पर पंचायती राज निदेशालय ने नाराजगी जताते हुए रिपोर्ट तलब की है।
पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने प्रदेश के 10 सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों से खर्च और विकास कार्यों का पूरा ब्योरा मांगा है। इसमें झांसी की स्थिति सबसे कमजोर बताई गई है। जिले के मऊरानीपुर, बामौर और गुरसराय ब्लॉक में करोड़ों रुपये खर्च नहीं हो सके। जिले में मऊरानीपुर, बामौर, बांगरा, मोंठ, बबीना, बड़ागांव, चिरगांव और गुरसराय समेत आठ ब्लॉक हैं। इन क्षेत्र पंचायतों के तहत करीब 599 वार्ड आते हैं, जहां से बीडीसी सदस्य चुने गए हैं। ब्लॉक प्रमुख और बीडीओ संयुक्त रूप से विकास कार्यों को संचालित करते हैं।
15वें केंद्रीय वित्त आयोग और पंचम राज्य वित्त आयोग से मिली धनराशि का उपयोग आवास, शौचालय, नाली, इंटरलॉकिंग सड़क और अन्य आधारभूत विकास कार्यों में किया जाना था, लेकिन ज्यादातर पंचायतों में काम न के बराबर हुए। दूसरी ओर बीडीसी सदस्य लगातार धन की कमी का हवाला देकर विकास न होने की बात कहते रहे हैं।
किस ब्लॉक में कितनी धनराशि पड़ी
ब्लॉक शेष धनराशि (करोड़ रुपये में)
मऊरानीपुर 4.62
बामौर 2.94
बांगरा 1.65
मोंठ 1.78
बबीना 0.75
बड़ागांव 0.75
चिरगांव 1.76
गुरसराय 1.09
क्षेत्र पंचायतों में विकास कार्य तेजी से कराने और कराए गए कार्यों का भुगतान कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। – डॉ. बाल गोविंद श्रीवास्तव, डीपीआरओ
