केजीएमयू के आर्थोपैडिक विभाग में भर्ती महिला मरीज को डॉक्टर ने निजी अस्पताल भेज दिया। वहां इलाज में घोर लापरवाही बरती गई। आरोप है कि मरीज को गलत ग्रुप का खून चढ़ा दिया गया। इससे मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने धन उगाही और लापरवाही बरतने के आरोप में डॉक्टर के खिलाफ एसीपी चौक को तहरीर दी है।
अंबेडकर नगर निवासी विनय दुबे ने पत्नी कमलेश देवी को 6 जून को केजीएमयू में भर्ती कराया था। आरोप है कि डॉक्टर ने बेहतर इलाज का झांसा देकर उन्हें कृष्णानगर स्थित निजी हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। इसके लिए करीब 45 हजार रुपये लिए गए। वहां केजीएमयू के डॉक्टर ने ही ऑपरेशन किया और मरीज को खून चढ़ाया। पति का आरोप है कि मरीज का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था। निजी ब्लड बैंक से ए पॉजिटिव ब्लड ग्रुप मंगाकर चढ़ा दिया गया। इससे मरीज की हालत बिगड़ गई। डॉक्टर ने दवाओं के जरिये ठीक होने का दावा किया। इसके बाद भी सेहत में सुधार नहीं हुआ। हालत बेहद नाजुक होने पर केजीएमयू में दोबारा 16 जून को भर्ती कराया गया। मरीज ट्रॉमा क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती रही। शनिवार को उसकी मौत हो गई।
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पहले भी आया था ऐसा ही मामला
लखीमपुर खीरी निवासी महिला पूनम ने केजीएमयू के ईएनटी विभाग में सितंबर 2024 को दिखाया था। रेजीडेंट डॉ. रमेश मरीज को खदरा स्थित केडी हॉस्पिटल ले गया था। वहां ऑपरेशन के दौरान महिला की हालत बिगड़ गई थी। इसके बाद मरीज को शताब्दी की वेंटिलेटर यूनिट में भर्ती कराया था, मगर महिला की मौत हो गई थी। प्राइवेट प्रैक्टिस करने पर डॉ. रमेश को केजीएमयू से निष्कासित कर दिया गया था।
केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि केजीएमयू के डॉक्टर जरिये मरीज को निजी अस्पताल ले जाने के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति होगी।
