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राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के सुबूत मिले हैं। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। दान राशि की गणना करने वाले कर्मियों और बैंककर्मियों के साथ चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव की भूमिका भी सामने आई है।
इसके अलावा दान राशि की गणना प्रक्रिया का निगरानी तंत्र पूरी तरह विफल रहा। छह दिन की जांच के बाद एसआईटी शनिवार को अयोध्या से लखनऊ लौट गई। जांच रिपोर्ट सोमवार को मुख्यमंत्री के सामने पेश की जा सकती है। इसके बाद दोषियों और जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। टिन्नू, गणनाकर्मियों और कुछ बैंककर्मियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है। शासन के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के पदाधिकारियों के जिला छोड़ने पर रोक लगा दी गई है।
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अयोध्या का राम मंदिर।
– फोटो : amar ujala
एसआईटी (विशेष जांच दल) की प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जिससे महासचिव चंपत राय भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। चढ़ाए गए जेवरात में बड़ी गड़बड़ी पाए जाने की बात सामने आई है। सोने, चांदी और हीरे जड़ित जेवरात का हिसाब-किताब ट्रस्ट के पदाधिकारी नहीं दे सके। एसआईटी ने करोड़ों की कीमत के जेवरात के हेरफेर की आशंका जताई है। छह जून को राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का मामला सामने आया था।
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राम मंदिर में प्रवेश करती एसआईटी की टीम
एक हफ्ते बाद 13 जून को ट्रस्ट ने एसआईटी से जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री से की। उसी दिन मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया। 15 जून को एसआईटी अयोध्या पहुंची थी।
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जांच के लिए पहुंची एसआईटी
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एसआईटी में शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज आईजी किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन ने मंदिर परिसर पहुंचकर तफ्तीश की। इस दौरान ट्रस्ट के पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों, गणना कर्मियों और संदिग्धों से लंबी पूछताछ की।
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अयोध्या पहुंची एसआईटी।
– फोटो : amar ujala
सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की जांच में दान राशि की लंबे समय से चोरी की पुष्टि हुई है। हालांकि अभी तक एसआईटी या शासन की तरफ से जांच रिपोर्ट को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। शासन के सूत्रों के मुताबिक एसआईटी अब तक की जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटी है।