लखनऊ में कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग में पंद्रह छात्रों की हुई मौत ने सभी को झकझोर डाला लेकिन, सरकारी सिस्टम से यह सवाल बना हुआ है कि आखिर क्यूं उसे इस तरह के हादसों का इंतजार रहता है। झांसी में गली-गली खुले कोचिंग, जिम, फिटनेस सेंटर, लाइब्रेरी समेत अधिकांश व्यवासायिक इमारतों में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।

लखनऊ के अलीगंज से भी बुरे हालात झांसी में हैं। यहां न सिर्फ संकरी गलियों में कोचिंग संस्थान, जिम सेंटर, नर्सिंग होम, होटल चल रहे हैं बल्कि धड़ल्ले से व्यावसायिक कारोबार भी इन्हीं गलियों में चल रहा है। मानिक चौक, सुभाष गंज, मजदूर वाली गली, बड़ा बाजार, सीपरी बाजार, गंधीगर का टपरा, गांधी रोड, खोया मंडी, इलेक्ट्रानिक मार्केट, गुसाई पुरा, चौधरयाना, खत्रियाना, चूड़ी वाली गली, मानिक चौक का मोबाइल मार्केट समेत दर्जनों इलाकों में सैकड़ों दुकानों खुली हुई हैं। यहां रोजाना हजारों लोग जमा रहते हैं। आने-जाने का रास्ता तक एक है। हैरानी की बात यह कि अधिकांश प्रतिष्ठानों में आग से बचाव के कोई इंतजाम तक नहीं है। ऐसे हैं, आग जैसी घटना होने पर यहां तक दमकल की गाड़ियां भी पहुंच नहीं सकेंगी। सीएफओ राजकिशोर राय का कहना है कि फायर ब्रिगेड की ओर से ऐसे प्रतिष्ठान संचालकों के यहां नियमित चेकिंग करके उनके खिलाफ नोटिस भी जारी की गई है। इनके लाइसेंस निरस्त किए जाने की जरूरत है।

प्रवेश एवं निकास के रास्ते एक

सिविल लाइंस, सीपरी बाजार, आंतिया ताल एवं इलाइट के पास कई कोचिंग चल रही हैं। इनमें से अधिकांश कोचिंग बहुमंजिली इमारतों पर स्थित हैं। इनमें प्रवेश एवं निकास का रास्ता भी एक ही है। दुर्घटना होने की स्थिति में अंदर से बाहर निकल पाना भी संभव नहीं है।

भवन उपविधि के नियमों का पालन नहीं

उप्र भवन निर्माण एवं विकास उपविधि के अनुसार, व्यावसायिक भवन खोले जाने के लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 12 मीटर होनी चाहिए। व्यावसायिक गतिविधियों के लिए प्रवेश एवं निकास के दरवाजे अलग होने चाहिए। इमारत के चारों ओर इतना स्थान भी छोड़ा जाना चाहिए, जिससे दमकल की गाड़ियां चारों ओर घूम सकें लेकिन, जेडीए की अनदेखी से संकरी गलियों में भी कोचिंग, होटल, नर्सिंग होम से लेकर व्यावसायिक इमारतें तक चल रही हैं।

यह विभाग खास तौर से जिम्मेदार

अग्निशमन विभाग

झांसी विकास प्राधिकरण

नगर निगम

जिला प्रशासन एवं पुलिस

विद्युत विभाग

होटल एवं रेस्तरा- 167

कोचिंग- 143

जिम एवं फिटनेस सेंटर-132

कर्मिशयल भवनों की संख्या- 12,000

आठ कोचिंग को छोड़ किसी ने नहीं लिए लाइसेंस

जनपद में सिर्फ आठ कोचिंग सेंटरों के पास ही पंजीकृत हैं। इसके बावजूद महानगर में सैकड़ों कोचिंग बिना पंजीकरण के ही धड़ल्ले से चल रही हैं। यह संस्थाओं मानक के विपरीत बनी बिल्डिंगों में ही छात्रों को पढ़ा रहे हैं। एक बैच में 30 से 50 तक पढ़ते हैं। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी सुशील बाबू के मुताबिक दो साल पहले सिटी मजिस्ट्रेट, अग्निशमन विभाग, पुलिस एवं जेडीए की संयुक्त टीम ने जांच की थी। इसके बाद से जांच नहीं हुई, इस वजह से पंजीकरण नहीं हुए।



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