डीएम की ओर से शुरू की गई न्यायालय आपके द्वार मुहिम के तहत बिना मुख्यालय आए मौके पर ही मामलों का निस्तारण किया जा रहा है। मंगलवार को भी अलग-अलग मामलों की सुनवाई करते हुए डीएम ने एक वादी को गुंडा एक्ट में एक लाख के मुचलके पर पाबंद किया। जबकि, तीन को जिला बदर कर दिया।
न्याय के लिए दौड़ते-भागते काफी समय बीत जाने के बावजूद समस्या का हल न निकल पाने से लोग परेशान हो जाते हैं। कई लोग तो थक हारकर घर बैठ जाते हैं। ऐसे लोगों के लिए न्यायालय आपके द्वार मुहिम मददगार साबित हो रही है। सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को हो रहा है, जो दूरदराज के इलाकों से न्याय के लिए मुख्यालय आते थे। लोगों का आने-जाने में पैसा भी खर्च होता था। अगर डीएम उपलब्ध नहीं होते थे तो उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता था। अब उन्हें मुख्यालय आने की जरूरत नहीं पड़ रही।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर सुनवाई
कई साल से अदालतों के चक्कर काट रहे लोगों के मामलों की सुनवाई डीएम गौरांग राठी खुद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करते हैं। मौके पर अधिकारियों को भेजकर जांच के बाद तुरंत न्याय मिलता है। अब तक काफी मुकदमों की सुनवाई करके उनका निस्तारण किया जा चुका है। डीएम की इस मुहिम की सराहना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर झांसी आए सीएम योगी आदित्यनाथ भी कर चुके हैं। मंगलवार को डीएम ने मुहिम के तहत मुकदमों के निस्तारण के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से राजस्व/ स्टांप कमी के वाद और फौजदारी जैसे तीन यूपी गुंडा अधिनियम और 17 आर्म्स एक्ट के वादों में सुनवाई की गई।
एक लाख के मुचलके से किया पाबंद
यूपी गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत थाना बरुआसागर के मामलों की डीएम ने सुनवाई की। उन्होंने सुरेंद्र यादव को एक लाख के मुचलके से पाबंद किया और छह माह तक हर शनिवार थाना में लाइन हाजिर होने का आदेश दिया। वहीं, आकाश, अजय गुर्जर और नंदू उर्फ प्रीतम सिंह को जिला बदर किया गया। वहीं, टांकोरी और लहरगिर्द के दो स्टांप मामलों की जांच लेखपाल और उप निबंधक को मौके पर भेजकर कराई। टांकोरी में ग्राम सभा की जमीन पर कब्जा मिलने पर पुन: जांच कर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कोर्ट रूम में एडीएम प्रशासन शिव प्रताप शुक्ला, संयुक्त निदेशक अभियोजन अजय कुमार मिश्रा आदि मौजूद रहे।
ये है पूरी प्रक्रिया
पीड़ित को अपने केस का पंजीकरण तहसील या न्यायालय में कराना होता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष अपनी बात रखते हैं। डीएम जमीन से संबंधित मामलों में लेखपाल आदि को मौके पर भेजते हैं। साक्ष्यों और गवाही के आधार पर डीएम फैसला सुनाते हैं। बताया गया कि साल 2023 में उच्चतम न्यायालय ने यह आदेश दिया था कि जिला स्तर पर वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुकदमों को सुना जाए। इसी दिशा में यह कार्य शुरू किया गया है।
