मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स स्टेडियम इन दिनों युवा जोश, अनुशासन और बड़े सपनों का केंद्र बना हुआ है। यहां पर पहलवान सुबह और शाम कड़ी मेहनत कर कुश्ती के दांवपेच सीख रहे हैं। पहलवान सुबह से ही फिटनेस, दौड़, वार्मअप और ताकत बढ़ाने वाले अभ्यास करते हैं और शाम को तकनीक, पकड़, बचाव और मुकाबले की रणनीति का अभ्यास कर रहे हैं। खिलाड़ियों का मानना है कि कुश्ती के खेल में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि धैर्य, तकनीक और लगातार अभ्यास की भी जरूरत होती है। लड़कों के साथ-साथ महिला पहलवान भी पूरे आत्मविश्वास के साथ मैट पर उतर रही हैं और साबित कर रही हैं कि मेहनत और हौसले के दम पर किसी भी मुकाम तक पहुंचा जा सकता है।
कुश्ती संघ के सचिव सुंदर ग्वाला ने बताया कि स्टेडियम में खिलाड़ी नियमित रूप से सुबह और शाम अभ्यास कर रहे हैं। फिटनेस, तकनीक और दांवपेच पर विशेष फोकस किया जा रहा है। कुश्ती का अच्छा माहौल बन रहा है। स्टेडियम में युवा पहलवान पूरी लगन के साथ अभ्यास कर रहे हैं। खिलाड़ियों में राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलने की ललक साफ दिखाई देती है।
पहलवान कपिल यादव ने बताया कि वह तीन बार यूनिवर्सिटी चैंपियन और दो बार राज्य स्तर प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम स्टेडियम में अभ्यास करके राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में खेलकर जिले और उत्तर प्रदेश का नाम रोशन करना चाहते है।
पहलवान राजा यादव ने बताया कि कोच से हर दिन नए दांवपेच सीखने को मिलते हैं, इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन की तैयारी भी मजबूत होती है।
बालिका तमन्ना समाधिया ने बताया कि लड़कियां अब हर खेल में आगे बढ़ रही हैं और कुश्ती में भी खुद को साबित कर रही हैं। मेरा सपना देश के लिए खेलना है। इसलिए प्रतिदिन अभ्यास करती हूं और कोच से नई-नई तकनीक सीख रही हूं।
बालिका पहलवान सृष्टि सैनी ने बताया कि कुश्ती में बहुत मेहनत होती है, लेकिन प्रतियोगिताओं शानदार प्रदर्शन की लालसा हो तो थकान महसूस नहीं होती। मैं लगातार अभ्यास करके अपने खेल में सुधार ला रही हूं जिससे आगे चलकर देश के लिए खेल सकूं।
