प्रदेश में बिजली दर निर्धारण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। राज्य विद्युत नियामक आयोग जल्द नई दरें घोषित कर सकता है। उम्मीद है कि इस वर्ष भी बिजली दरें नहीं बढ़ेंगी। उधर, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने घोषणा की है कि नोएडा पॉवर कंपनी के उपभोक्ताओं को 10 फीसदी छूट बरकरार रखने के लिए संघर्ष किया जाएगा।
प्रदेश में वर्ष 2026–27 की वार्षिक राजस्व आवश्यकता के तहत पॉवर कॉर्पोरेशन व बिजली वितरण कंपनियों द्वारा वर्ष 2024–25 के ट्रूअप में लगभग 3,995 करोड़ और वर्ष 2026–27 के लिए लगभग 12,453 करोड़ रुपये का राजस्व अंतर दर्शाया गया है।
इस तरह लगभग 16,448 करोड़ रुपये के अंतर को आधार बनाकर बिजली दरों में वृद्धि की मांग की गई है। विभिन्न स्थानों पर हुई जनसुनवाई में उपभोक्ता परिषद ने इसे खारिज किया। अवधेश वर्मा ने कहा कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का करीब 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस है। इसका भुगतान करने के लिए बिजली दरें 10 से 20 फीसदी कम की जाएं।
जनसुनवाई के बाद नियामक आयोग के समक्ष राज्य सलाहकार समिति की बैठकें भी हो चुकी हैं। अब नियामक आयोग कभी भी नई बिजली दरों की घोषणा कर सकता है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश की बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का करीब 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस है। ऐसे में किसी भी कीमत पर बिजली दरें नहीं बढ़ाई जा सकती है। उत्तर प्रदेश लगातार छठवें साल भी बिजली दरें नहीं बढ़ाने वाला राज्य बनेगा।
