कोंच। अपने 13 वर्षीय बेटे को सीने से लगाने की आस लगाए एक मां पिछले 22 दिनों से दर-दर की ठोकरें खा रही है। घर से लापता हुआ बेटा कानपुर के बालगृह में होने की जानकारी मिलने के बाद भी उसे अब तक मां के सुपुर्द नहीं किया गया है। शनिवार को पुलिस अधिकारियों के आश्वासन पर दोबारा कानपुर पहुंची मां को इस बार भी खाली हाथ लौटना पड़ा।
कस्बे की कांशीराम कॉलोनी निवासी सूफिया का 13 वर्षीय बेटा शुभान छह जून को दुकान से सामान लेने घर से निकला था, लेकिन घर नहीं लौटा। काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं लगा तो सात जून को सूफिया ने कोतवाली में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
कुछ दिनों बाद सूफिया के भाई के पास कानपुर के कल्याणपुर स्थित बालगृह से फोन आया, जिससे पता चला कि शुभान वहां सुरक्षित है। बेटे के मिलने की उम्मीद में सूफिया तुरंत बालगृह पहुंची और मां होने के सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए। इसके बावजूद बालगृह प्रशासन ने बच्चे को उसके सुपुर्द नहीं किया।
सूफिया का आरोप है कि कर्मचारियों ने कार्रवाई पूरी होने के बाद बच्चे को सौंपने का भरोसा दिया था, लेकिन तमाम औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी उसे हर बार निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
शनिवार को सूफिया ने फिर कोंच कोतवाली पहुंचकर पुलिस से मदद की गुहार लगाई। कोतवाली प्रभारी बृजेश बहादुर सिंह ने बालगृह के स्टाफ से बातचीत कर उसे आश्वस्त किया कि दोबारा जाने पर बच्चे को सौंप दिया जाएगा। इस भरोसे पर वह फिर कानपुर पहुंची, लेकिन इस बार भी बेटे को नहीं मिल सका।
लगातार भागदौड़ और बेटे से बिछड़ने के दर्द ने मां की सेहत पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। सूफिया का कहना है कि वह कई दिनों से अधिकारियों और कार्यालयों के चक्कर काट रही है, लेकिन उसका बेटा अब तक उसकी गोद में नहीं लौट सका। 22 दिनों से मां-बेटे के बीच बनी दूरी ने पूरे परिवार को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया है। अब सूफिया को केवल अपने बेटे के सकुशल घर लौटने का इंतजार है।
