राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले की जांच में हैसियत से कई गुना ट्रांजेक्शन आरोपियों के बैंक खातों में मिला है। साल भर में सभी आरोपियों के खातों की डिटेल में हैसियत से ज्यादा रकम के ट्रांजेक्शन के सबूत मिले हैं। एसआईटी और पुलिस ने इसको सबूत के तौर पर जांच में शामिल किया है। सभी के मकान, प्लॉट और हॉस्टल समेत कई संपत्तियों का ब्योरा जुटाकर उसकी कीमत का आकलन किया जा रहा है। वहीं पुलिस अनिल और गोपाल को भी नोटिस जारी कर चुकी है। लेकिन दोनों से अभी तक पूछताछ नहीं की गई है।
प्रकरण में एसआईटी और पुलिस दोनों की जांच चल रही है। पुलिस ने भी बैंकों से आरोपियों के बैंक खातों का विवरण मांगा था। इसमें आरोपियों के कई परिवार वालों के खाते भी शामिल हैं। एक-एक आरोपी व उनके परिजनों के खातों में जितनी रकम का ट्रांजेक्शन हुआ है, उसका उनकी सैलरी से मिलान नहीं हो सका। क्योंकि कमाई न के बराबर है और रकम इधर-उधर लाखों-करोड़ों की हुई। ये सबूत यह साबित करने के लिए काफी हैं कि आरोपियों ने जो रकम चढ़ावे की पार की, उसे इधर-उधर खपाई।
ये भी पढ़ें – राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष से होगी पूछताछ, वित्तीय निगरानी से जुड़े होंगे सवाल; छह जुलाई को होगी बैठक
ये भी पढ़ें – राम मंदिर चढ़ावा चोरी: जेल पहुंची पुलिस, आरोपी अविनाश शुक्ला से दो घंटे चली पूछताछ, मिले थे 20 लाख रुपये
टिन्नू के हॉस्टल के दस्तावेजों को भी जुटाया है। अब उसकी जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी रकम उसके पास कहां से आई। वहीं, एसआईटी के प्रमुख तीनों अधिकारी बुधवार या बृहस्पतिवार को दोबारा अयोध्या पहुंच सकते हैं। हालांकि एसआईटी से जुड़े अन्य कर्मचारी व अधिकारी अयोध्या में ही हैं।
जब्त की जाएंगी संपत्तियां
सूत्रों के मुताबिक पुलिस की जांच इस दिशा में चल रही है कि आरोपियों ने चोरी की कमाई से जो भी संपत्तियां बनाई हैं, उनको जब्त करने की कार्रवाई करनी है। यहां तक कि एसआईटी ने अनुकल्प द्वारा कराई गई कथा का भी ब्योरा जांच में शामिल किया है, जिसमें पांच लाख रुपये से अधिक का खर्च किया गया था। जबकि अनुकल्प की सैलरी सिर्फ 18 से 20 हजार रुपये ही थी।
