नगर निगम की स्ट्रीट लाइटों में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। स्मार्ट सिटी में लगाई जाने वाली स्ट्रीट लाइटों को बीच रास्ते गायब किए जाने की शिकायतों के बाद अधिकारियों की सख्ती रंग लाई। जांच के दौरान संदेह के घेरे में आए एक आउटसोर्स कर्मचारी ने करीब 20 स्ट्रीट लाइटें नगर निगम में वापस जमा करा दीं। हालांकि यह खेल कब से चल रहा था और इसमें कितने लोग शामिल हैं, इसका खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा।
नगर निगम जनप्रतिनिधियों, पार्षदों और स्थानीय लोगों की मांग के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें लगवाता है। इसके लिए जोनवार टीमें तैनात हैं। किसी क्षेत्र से लाइट खराब होने की सूचना मिलने पर टीम मौके पर जाकर जांच करती है। यदि लाइट मरम्मत योग्य नहीं होती तो नई लाइट लगाई जाती है। इसी व्यवस्था की आड़ में स्ट्रीट लाइटें गायब किए जाने का मामला सामने आया। सूत्रों के अनुसार, कुछ पार्षदों ने अधिकारियों से शिकायत की थी कि नगर निगम के स्टोर से निकलने के बाद कई स्ट्रीट लाइटें निर्धारित स्थानों तक पहुंच ही नहीं रहीं। कुछ ऐसे स्थानों की भी जानकारी दी गई, जहां नई लाइट लगाने के लिए सामग्री तो जारी हुई, लेकिन मौके पर लाइटें नहीं लगाई गईं।
शिकायतों के बाद मार्ग प्रकाश व्यवस्था देख रहे अधिकारियों ने जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में एक आउटसोर्स कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध मिली। अधिकारियों की सख्ती के बाद उसने करीब 20 स्ट्रीट लाइटें नगर निगम में वापस रखवा दीं। फिलहाल विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मामले पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
साढ़े तीन हजार से नौ हजार रुपये तक की होती है एक लाइट
नगर निगम के वित्तीय वर्ष 2026-27 के मूल बजट में मार्ग प्रकाश विभाग के लिए 34.70 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसी मद से स्ट्रीट और फैंसी लाइटों की खरीद एवं स्थापना होती है। अधिकारियों के अनुसार, 90 वॉट की एलईडी स्ट्रीट लाइट की कीमत लगभग 3,500 रुपये और 200 वॉट की एलईडी लाइट की कीमत करीब 9,000 रुपये होती है।
इनका यह है कहना
मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -आकांक्षा राणा, नगर आयुक्त
