झांसी। बैंकों में सबसे ज्यादा फंसा हुआ कर्ज नान परफार्मिंग एसेट्स (एनपीए) कृषि ऋण के तौर पर सामने आया है। झांसी में सरकारी एवं प्राइवेट बैंकों ने 39,306 खातों से बांटा गया 5.01 अरब रुपये का कृषि ऋण अब तक एनपीए हो चुका। दूसरे स्थान पर एनएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) सेक्टर है। इस सेक्टर को दिए 1.58 अरब एनपीए हो गए। अन्य सेक्टरों में भी एनपीए वाले खातों में इजाफा हुआ है।
खेतीबाड़ी से लेकर सरकारी योजनाओं के पात्रों को बैंक मामूली ब्याज दरों में ऋण देते हैं। सरकारी एवं प्राइवेट बैंक 90.21 अरब रुपये बतौर ऋण के तौर पर दे चुके लेकिन, इसमें से बैंकों के 7.80 अरब रुपये वापस नहीं आए। खेती किसानी के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से रियायती ब्याज पर ऋण दिया गया। कृषि उपकरण समेत अन्य कृषि कार्य के लिए भी कर्ज दिया गया, लेकिन पैसा समय पर बैंकों तक वापस नहीं आता। कृषि कार्य में दिया 501 करोड़ रुपये एनपीए हो गया। यह पूरे एनपीए रकम का 64 फीसदी है। वहीं, एमएसएमई सेक्टर ने 158 करोड़, सरकारी योजनाओं के खाता धारकों ने 12 करोड़, एनआरएलएम के 223 खाताधारकों ने 8 करोड़ नहीं लौटाए। हालांकि, बैंक अफसरों का कहना है कि अनुपातिक तौर पर कृषि ऋण का एनपीए अधिक नहीं बढ़ा है।
एलडीएम योगेश ठाकुर का कहना है कि समय से ऋण न लौटाने की वजह से बैंकों को मजबूरन यह बैंक खाते एनपीए में डालना पड़ा। हालांकि, इनसे रिकवरी के प्रयास भी बैंक लगातार करते हैं।
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40 करोड़ तक बढ़ चुका एनपीए
वित्तीय वर्ष 2022-23 की समाप्ति पर झांसी में बैंकों का एनपीए 6.50 अरब रुपये था। लेकिन, बाद में यह रकम बढ़ती गई। अब 7.80 अरब हो चुका है। पिछले वित्तीय साल में यह 7.40 अरब था। इस तरह चालू वित्तीय वर्ष में करीब 40 करोड़ रुपये का एनपीए बढ़ गया।
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कृषि ऋण के एनपीए होने के पीछे मौसम की भूमिका
बुंदेलखंड में खेती-किसानी के लिए सबसे बड़ी बाधा पिछले कई फसली सीजन के दौरान मौसम बनकर उभरा है। पिछले लगातार पांच फसली सीजन में रबी और खरीफ की फसल मौसम की बेरुखी की वजह से खराब हो गई। फसल खराब होने से किसानों को काफी नुकसान हुआ। इस वजह से वह बैंकों से लिया हुआ कर्ज वापस नहीं कर पा रहे हैं।
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प्रमुख बैंक का एनपीए (करोड़ रुपये में)
पंजाब नेशनल बैंक : 290
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) : 170
ग्रामीण बैंक : 110
एचडीएफसी बैंक : 21
इंडियन बैंक : 8
इंडसइंड बैंक : 6
आईसीआईसीआई बैंक 7
