झांसी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में आए पूर्व सपा विधायक दीपनारायण यादव के खिलाफ कार्रवाई की नींव आय से अधिक संपत्ति के मामले से पड़ी। विजिलेंस जांच में सामने आया कि उन्होंने अपनी घोषित आय से करीब 23 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए, जिसका संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। यही तथ्य आगे चलकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का आधार बना।
भाजपा विधायक जवाहर लाल राजपूत की शिकायत पर वर्ष 2021 में विजिलेंस ने पूर्व विधायक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच शुरू की थी। शासन के निर्देश पर हुई खुली जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद वर्ष 2022 में विजिलेंस ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
जांच में सामने आया कि दो बार विधायक रहे दीपनारायण यादव ने अपने कार्यकाल के दौरान 14.30 करोड़ रुपये की आय अर्जित की, जबकि 37.32 करोड़ रुपये खर्च किए। यानी उनकी आय की तुलना में 23.02 करोड़ रुपये अधिक व्यय पाया गया। विजिलेंस के अनुसार, इस अंतर का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सका।
इसी आधार पर मामला प्रवर्तन निदेशालय तक पहुंचा। ईडी अब मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच कर रही है। एजेंसी की प्रारंभिक पड़ताल में जमीन कारोबार, निर्माण कार्य और विभिन्न कंपनियों व लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) के माध्यम से संपत्तियां जुटाने और उनके जरिए धन शोधन के संकेत मिले हैं। ईडी संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व, वित्तीय लेन-देन और कथित अवैध धन के स्रोतों से जुड़े साक्ष्य जुटाने में लगी है।
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596 करोड़ की संपत्ति हो चुकी सीज, 50 से अधिक मुकदमे दर्ज
पूर्व विधायक दीपनारायण यादव और उनके सहयोगियों पर वर्ष 2021 के बाद से पुलिस और प्रशासन का शिकंजा लगातार कसता गया। अब तक उनकी और उनके सहयोगियों की करीब 596 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति विभिन्न मामलों में सीज की जा चुकी है।
उनके खिलाफ झांसी, कन्नौज सहित कई जिलों में 50 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, रंगदारी, हत्या के प्रयास, डकैती, दंगा और गैंगस्टर एक्ट जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। कुछ माह पहले मोंठ क्षेत्र में दर्ज लूट और रंगदारी के मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।
प्रशासन ने अलग-अलग चरणों में नवंबर 2022 में 130 करोड़, जनवरी 2023 में 107 करोड़, वर्ष 2025 में 263 करोड़, दिसंबर 2025 में 20.26 करोड़ और मई 2026 में 24.28 करोड़ रुपये की संपत्तियां सीज की थीं।
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चुनाव से पहले ईडी की कार्रवाई से गरमाई सियासत
विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ईडी की कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है। ईडी की टीम के झांसी पहुंचने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच ”एक्स” पर केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की।
हालांकि, बुधवार को ईडी की कार्रवाई के बाद देर रात तक समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इधर, पूर्व विधायक दीपनारायण यादव और उनके पुत्र मून यादव पिछले कुछ समय से गरौठा विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं और उनके चुनाव लड़ने की चर्चाएं भी चल रही हैं।
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प्राइवेट बैंक से मंगाई गईं नोट गिनने की मशीनें
सूत्रों के अनुसार, प्रयागराज से आई ईडी टीम मंगलवार से ही झांसी में डेरा डाले हुए थी। कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया और स्थानीय पुलिस को भी पहले से सूचना नहीं दी गई। बुधवार तड़के सुरक्षा बल की मांग किए जाने के बाद पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई की जानकारी मिली।
बताया जाता है कि ईडी ने एक निजी बैंक से पहले ही चार कर्मचारियों और दो नोट गिनने वाली मशीनों की व्यवस्था कराई थी। बैंक कर्मचारियों को कार्रवाई के स्थान की जानकारी नहीं दी गई थी। मौके पर पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन भी अपने पास रखवा लिए गए और पूरी कार्रवाई के दौरान किसी को भी मोबाइल इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं थी।
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बिल्डरों और कारोबारियों से भी हुई पूछताछ
ईडी की टीम ने पूर्व विधायक के करीबी माने जाने वाले कई बिल्डरों और कारोबारियों से भी पूछताछ की। जमीन के सौदों और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटाई गई। देर रात तक कार्रवाई जारी रही और गुरुवार को भी जांच आगे बढ़ने की संभावना जताई गई।
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पुत्र के लग्जरी कारों के काफिले की भी चर्चा
पूर्व विधायक के पुत्र मून यादव का लग्जरी कारों का काफिला भी पिछले कई महीनों से चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह अक्सर तीन या उससे अधिक महंगी गाड़ियों के काफिले के साथ क्षेत्र में दिखाई देते हैं। दूसरी ओर, पूर्व विधायक की छह लग्जरी कारें पहले की कार्रवाई में सीज होकर कई वर्षों से नवाबाद थाने में खड़ी हैं।
