चढ़ावा चोरी मामले में अब तक पुलिस ने बैंक कर्मियों पर कार्रवाई नहीं की है। न किसी को आरोपी बनाया है। पुलिस आखिर इन जिम्मेदारों पर नरमी क्यों बरत रही है, ये सवाल उठने लगा है। एसआईटी ने भी स्पष्ट रूप से बैंक कर्मियों की भूमिका प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में उजागर की थी, इसके बावजूद अब तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
चढ़ावा चोरी मामले में अब तक जो जेल गए हैं उसमें चंपत राय का करीबी टिन्नू यादव, गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव व छह गणना कर्मी शामिल हैं। एसआईटी की रिपोर्ट में स्पष्ट था कि दान राशि की गणना में बाकायदा एमओयू हुआ था। जो ट्रस्ट और बैंक के बीच था। लिहाजा निगरानी करना बैंक की जिम्मेदारी थी। वहीं दो कर्मियों के भी नाम सामने आए थे, जिनकी ड्यूटी रहती थी। कुछ समय पहले उनको ड्यूटी से हटाया भी था। ऐसे में बैंक कर्मियों पर कानूनी कार्रवाई होनी थी लेकिन अब तक पुलिस ने किसी पर भी कोई कार्रवाई नहीं की है।
पूछताछ तक सीमित रही कार्रवाई
पुलिस मामले में बैंक कर्मियों व अधिकारियों से कई बार पूछताछ की। उसके पहले एसआईटी ने भी उनसे पूछताछ की थी। मामले में बैंक अपने स्तर से विभागीय जांच करवा रही है। लेकिन, पुलिस की कार्रवाई सिर्फ पूछताछ तक ही सीमित रही है। ये तब है जब गणना इंचार्ज जेल भेजा जा चुका है। ट्रस्ट के बड़े दो पदाधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं। बैंक कर्मियों पर कार्रवाई न करना पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
पांच और संदिग्धों से पूछताछ
पुलिस ने सबसे पहले अविनाश शुक्ला और बाद में अनुकल्प, लवकुश व करुणेश को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। सूत्रों के मुताबिक इन सभी से पूछताछ में आठ से दस और नाम सामने आए थे। उनमें से पांच लोगों से पुलिस ने पूछताछ की है। इनमें से एक दो की भूमिका पर शक गहराया है। इसमें कई गणनाकर्मी भी शामिल हैं।
