राज्य कर विभाग में आईएएस अधिकारियों की तैनाती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। नोएडा के बाद अब कानपुर और गाजियाबाद में भी आईएएस अधिकारियों को एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-वन का प्रभार दिया गया है। विभाग में चार आईएएस अधिकारियों की तैनाती की तैयारी मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, आगरा या वाराणसी में भी जल्द किसी आईएएस अधिकारी को इसी पद पर तैनात किया जा सकता है।
बृहस्पतिवार देर रात जारी आदेश में आईएएस अधिकारी परीक्षित खटाना को नोएडा व अजय कुमार गौतम को गाजियाबाद में एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-वन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इससे पहले कानपुर में भी एक आईएएस अधिकारी की तैनाती हो चुकी है। विभागीय हलकों में इसे प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करने की कवायद माना जा रहा है।
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मूल काडर में असंतोष: इस फैसले से राज्य कर विभाग के मूल काडर के ग्रेड-वन अधिकारियों में असंतोष बढ़ गया है। विभाग में एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-वन के कुल 22 पद हैं और सभी पर नियमित अधिकारी तैनात हैं। आईएएस अधिकारियों को इसी पद का प्रभार दिए जाने से वरिष्ठ अधिकारियों के अधिकार और निर्णय क्षमता प्रभावित हो रही है। वाणिज्य कर सेवा संघ के एक पदाधिकारी का कहना है कि जिस जिले में एक ही स्तर के दो अधिकारी होंगे, वहां आईएएस अधिकारी का निर्णय ही प्रभावी माना जाएगा। इससे मूल कैडर के अधिकारियों की भूमिका सीमित हो जाएगी।
तकनीकी अनुभव की अनदेखी: विभागीय सूत्रों के अनुसार, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-वन के 22 पदों में से केवल दो पद ही आईएएस अधिकारियों के लिए स्वीकृत हैं। इसके बावजूद लगातार आईएएस अधिकारियों की तैनाती बढ़ने से कैडर अधिकारियों में भविष्य को लेकर चिंता है। उनका कहना है कि राज्य कर जैसे तकनीकी विभाग में 20 से 22 वर्ष का फील्ड अनुभव रखने वाले अधिकारियों के सुझावों का पर्याप्त उपयोग नहीं हो पा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों का यह भी कहना है कि राज्य सरकार के कुल कर राजस्व में राज्य कर विभाग की हिस्सेदारी लगभग 19 फीसदी है। उनका दावा है कि केंद्रीय जीएसटी जैसे तकनीकी कर प्रशासन में फील्ड स्तर पर आईएएस अधिकारियों की तैनाती नहीं की जाती।
