यूपी में अगले वर्ष होने वाले चुनाव को लेकर हलचल शुरू हो चुकी है। सभी दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं, नेताओं ने भी अपने सुरक्षित भविष्य को लेकर संभावनाएं तलाशना शुरू कर दिया है पर एक मामले में हाथी वाली पार्टी ने उन्हें मौका नहीं दिया। वहीं, एक साहब चंदा चोरी मामले के बाद अब ट्रस्ट की कमान अपने हाथ में लेने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। वहीं, एक और धनकुबेर साहब रेस्टोरेंट के व्यवसाय में हैं। पढ़ें ये किस्से: 

हाथी पर नहीं चढ़ सकेंगे दागी

पूर्वांचल के एक दबंग नेता हाथी की सवारी के लिए मचल रहे थे। पूर्व मंत्री होने का तमगा लेकर पार्टी में दोबारा शामिल होने की जद्दोजहद खूब की लेकिन हाथी ने उनको सवार करने से इन्कार कर दिया। हाथी भी जान गया कि कहीं इनको फिर से जगह दी तो धोखा ही मिलेगा। जिसकी सत्ता होगी, वहां की सवारी करने के लिए खिसकने में समय नहीं लेंगे। फिलहाल ऐसे दागियों से दूरी बनाकर हाथी अपनी चाल चल रहा है। इस बार के तेवर से लगता है कि जंगल के राजा का नाम हाथी ही तय करेगा।

नहीं गलेगी साहब की दाल

सेवा से निवृत्त होने के बाद भी साहब अपनी सियासी हांडी गरम करने में जुटे हैं। चंदा चोरी के बाद ट्रस्ट पर आए संकट के बाद साहब की कोशिश है कि इस बार ट्रस्ट की कमान उनके हाथ आ जाए। लिहाजा वह पूरी ताकत झोंके हुए हैं। इसके लिए साहब अपने सियासी सिपहसालारों को साधे हुए हैं। साथ ही देवभूमि के एक महामंडलेश्वर को यह पद दिलाने के लिए लामबंदी में लगा दिया है। महामंडलेश्वर भी ठहरे मझे हुए लाईजनर। चर्चा है, साहब भले ही सत्ता के पसंदीदा माने जाते हैं लेकिन उनके पुराने कारनामे उनकी दाल गलने नहीं देंगे।

धनकुबेर नौकरशाह

खबर है कि एक नौकरशाह ने अपनी नौकरी के कुछ वर्षों में ही अकूत धन-दौलत इकट्ठी कर ली है। मथुरा में उनका बड़ा रेस्टोरेंट चल रहा है। एनसीआर में एक बिल्डर के साथ उनकी पार्टनरशिप भी बताई जा रही है। इतना ही नहीं अतिथियों को अपने प्रभाव वाले इलाकों में होटल में ठहराने के बाद वे भुगतान कराना ही भूल जाते हैं। एक लेखपाल से उनकी दोस्ती के चर्चे भी आम हैं।

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