एसएनसीयू में 15 नवंबर 2024 को एक्सटेंशन बोर्ड में स्पार्किंग से लगी आग में 18 नवजातों की मौत के बाद भी मेडिकल कॉलेज की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकी है। हादसे के बाद विद्युत व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा (एडीईएस) की ऑडिट रिपोर्ट में अब भी 472 गंभीर खामियां सामने आई हैं। इनमें 31 स्थानों पर प्रतिबंधित एक्सटेंशन बोर्ड का इस्तेमाल पाया गया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विद्युत व्यवस्था सुधारने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। पीडब्ल्यूडी की ओर से 12 करोड़ रुपये के कार्य का करीब 95 प्रतिशत और यूपीपीसीएल की ओर से 13.41 करोड़ रुपये के कार्य का लगभग 60 प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा हॉस्टलों में 4.80 करोड़ रुपये की लागत से वायरिंग सुदृढ़ीकरण का कार्य चल रहा है, जबकि 7.50 करोड़ रुपये की अन्य विद्युत परियोजनाएं शुरू होनी हैं। इसके बावजूद सुरक्षा संबंधी गंभीर कमियां बरकरार हैं।
27 अप्रैल से 1 मई 2026 के बीच विद्युत सुरक्षा विभाग द्वारा किए गए ऑडिट में वार्ड-3 के एक्स-रे कक्ष, लेबर रूम, एंडोस्कोपी रूम, सिस्टर ड्यूटी रूम, एमओ रूम, सेमिनार कक्ष तथा कई वार्डों और कमरों में एक्सटेंशन बोर्ड का उपयोग मिला। कई जगह बिना प्लग के उपकरण सीधे एक्सटेंशन बोर्ड से संचालित किए जा रहे थे। रिपोर्ट में इन सभी एक्सटेंशन बोर्डों को तत्काल हटाने की संस्तुति की गई है।
ऑडिट रिपोर्ट की प्रमुख आपत्तियां
वार्ड-3 के एक्स-रे कक्ष में एसी के लिए अस्थायी तार खींचकर बिजली आपूर्ति।
एक्स-रे मशीन एक्सटेंशन बोर्ड से संचालित मिली।
एलटी पैनल रूम में फायर फाइटिंग उपकरण नहीं मिले।
कई चेंजओवर खराब तथा अधिकांश सॉकेट में अर्थिंग नहीं मिली।
स्किल लैब में टूटे हुए स्विच बोर्ड मिले।
गुर्दा रोग ओपीडी और कक्ष संख्या-109 में एसी अस्थायी वायरिंग से जुड़े मिले।
ईएनटी विभाग में अस्थायी विद्युत वायरिंग मिली।
कक्ष संख्या-94 में एक्सटेंशन बोर्ड से इंडक्शन चूल्हा और इलेक्ट्रिक केतली संचालित मिली।
कक्ष संख्या-89 में एसी एक्सटेंशन बोर्ड से चलता मिला।
कई स्थानों पर मानक के विपरीत एल्युमिनियम वायरिंग पाई गई।
हादसे के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
15 नवंबर 2024 को एसएनसीयू में एक्सटेंशन बोर्ड में स्पार्किंग से भीषण आग लग गई थी। हादसे में 10 नवजातों की मौके पर मौत हुई थी, जबकि बचाए गए आठ अन्य शिशुओं ने बाद में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े दावे किए गए थे लेकिन ताजा ऑडिट रिपोर्ट उन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
कार्यदायी संस्था को ऑडिट में दर्ज सभी आपत्तियों के निस्तारण के निर्देश दे दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज परिसर में एक्सटेंशन बोर्ड का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि कहीं इसका उपयोग पाया गया तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। – डॉ. सुधीर कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
सुलगते सवाल
18 नवजातों की मौत के बाद भी प्रतिबंधित एक्सटेंशन बोर्ड का इस्तेमाल क्यों जारी है?
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ऑडिट में 472 गंभीर खामियां कैसे मिलीं?
जिन अधिकारियों ने कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी की, उनकी जवाबदेही तय होगी या नहीं?
ऑडिट में चिह्नित खामियों को दूर करने की समय-सीमा क्या है?
क्या एसएनसीयू अग्निकांड की जांच में सुझाए गए सुरक्षा उपाय पूरी तरह लागू किए गए थे?
