मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत जनपद में लक्ष्य से भी ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। विभागीय आंकड़ों को देखें तो योजना के तहत अब तक 2596 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिसमें से बैंकों की ओर से सिर्फ 632 आवेदन ही स्वीकृत किए हैं। इनमें 554 पात्रों को 232.42 लाख का ऋण बांटा भी जा चुका है।
जिला उद्योग केंद्र के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत 2500 का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। आवेदन विभिन्न बैंकों को भेजे गए लेकिन इनमें से सिर्फ 632 आवेदनों को ही स्वीकृति मिल सकी है। जबकि, 551 आवेदन बैंकों ने निरस्त कर दिए। विभागीय समीक्षा बैठक में भी कुछ को छोड़ दें तो ज्यादातर बैंकों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिला। कई बैंकों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं। इस संबंध में उपायुक्त उद्योग मनीष चौधरी का कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से लगातार बैंकवार समीक्षा, पत्राचार और समन्वय बैठक कर योजना को गति देने का प्रयास जारी है। अब तक 554 आवेदकों को बैंकों की ओर से 232.42 लाख रुपये का ऋण बांटा जा चुका है।
केस-1
रक्सा से आए रामविलास ने बताया कि उन्होंने युवा उद्यमी योजना के तहत आवेदन किया था लेकिन अब तक आवेदन की प्रक्रिया कहां तक पहुंची, इसकी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं हो पा रही है। अभी तक उन्हें यह भी मालूम नहीं है कि उनकी फाइल ऋण के लिए बैंक भेजी भी गई या नहीं। यदि इसकी जानकारी हो जाए तो बैंक जाकर लोन के लिए प्रयास करें।
केस-2
गुरसराय के युवा रविंद्र वेल्डिंग का काम शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने पांच लाख का ऋण लेने के लिए आवेदन किया था। विभाग की ओर से आवेदन स्वीकृत कर लिया गया पर अब किस स्थिति में है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। यदि जानकारी मिल जाए तो वह अपने उद्योग को स्थापित करने का प्रयास शुरू कर दें।
अन्य योजनाओं का भी बुरा हाल
ओडीओपी (एक जनपद-एक उत्पाद) के तहत इस साल 23 लाभार्थियों को ऋण देने का लक्ष्य मिला था। विभाग को 74 आवेदन प्राप्त हुए। बैंक ने 15 आवेदन स्वीकृत किए हैं। इनमें मात्र 10 पात्रों को 20.25 लाख रुपये का ऋण बांटा गया। आठ मामले अब भी लंबित हैं। इसी प्रकार से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 150 लाभार्थियों को ऋण देने का लक्ष्य मिला था। 151 आवेदन में से बैंक ने 47 आवेदन स्वीकृत कर 127.32 लाख रुपये का लोन वितरित किया। 104 मामले अभी भी लंबित हैं।
