उत्तर प्रदेश में राज्य कर विभाग में पिछले सप्ताह शासन की ओर से किए गए 376 सहायक आयुक्तों के स्थानांतरण को लेकर विभाग के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है। आरोप हैं कि स्थानांतरण नीति की अनदेखी कर कई अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर तैनात किया गया, जिनमें विभागीय एवं सतर्कता जांच के दायरे में रहे अधिकारी भी शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, सबसे अधिक चर्चा एक सहायक आयुक्त के स्थानांतरण को लेकर है। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी पहले करीब चार वर्ष तक गाजियाबाद सचल दल में तैनात रह चुकी हैं। नियमों के अनुसार, किसी अधिकारी की कार्यावधि पूरी होने के बाद उसी जिले में दोबारा तैनाती नहीं की जा सकती। 

इसके बावजूद उन्हें पुनः गाजियाबाद भेजते हुए टैक्स ऑडिट जैसे संवेदनशील पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई। आरोप यह भी है कि विभाग के आंतरिक पोर्टल पर उनके सेवा विवरण में पूर्व की गाजियाबाद तैनाती के स्थान पर आगरा की पोस्टिंग दर्ज कर दी गई, जबकि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उनकी कभी आगरा में तैनाती नहीं रही।

जांच पूरी होने से पहले ही संवेदनशील जिम्मेदारियां दे दी गईं

विभाग में उन अधिकारियों की तैनाती पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अथवा सतर्कता जांच जैसे मामले लंबित बताए जा रहे हैं। आरोप है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक जिले में सचल दल में तैनाती के दौरान जांच के दायरे में आए कुछ अधिकारियों को जांच पूरी होने से पहले ही पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के जिलों में फिर से सचल दल जैसी संवेदनशील जिम्मेदारियां दे दी गईं। 

कर्मचारी संगठनों और अधिकारियों का कहना है कि यदि सेवा विवरण में किसी प्रकार का बदलाव कर स्थानांतरण किए गए हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। हालांकि विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

छह महीने पहले हुआ तबादला, पर नहीं हुए कार्यमुक्त

इसी बीच मुख्यालय में तैनात एक अपर आयुक्त की तैनाती भी चर्चा में है। उनका तबादला फरवरी में गोरखपुर हो चुका था, लेकिन करीब छह महीने बाद भी उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार, अब उनके तबादले को रद्द अथवा संशोधित कराने की कोशिशें भी चल रही हैं।



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